भागवत भगवान का वाङ्गमय स्वरूप है : मां कनकेश्वरी देवी

  • दूसरे के काम का श्रेय लेना कलयुग का लक्षण

भोपाल, 16 अक्टूबर. श्रीमद् भागवत भगवान कृष्ण का वाङ्गमय स्वरूप है. भगवान कृष्ण का सत चित आनंद स्वरूप है जो हमारे तीनों तापों का विनाश करने वाला है.

राष्ट संत माँ कनकेश्वरी देवी ने यह सद्विचार रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिवस में व्यक्त किये. स्वर्गीय प्रसून सारंग की समृति में आयोजित भागवत कथा में माँ कनकेश्वरी ने कहा कि प्रत्येक मानव किसी न किसी ताप से प्रभावित है और इस ताप के कारण हम आनंद को प्राप्त नहीं कर पाते. इसीलिये भागवत हमारे जीवन में अनिवार्य है. सत्संग अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग रहते है. एक असंतुष्ट तो दूसरे अति असंतुष्ट. इसके पीछे भी हमारा ताप ही मूल कारण है.

उन्होंने कहा कि अति धनवान और विद्वान व्यक्ति से सदैव दूरिया बनाकर रखो. यह आपके जीवन को प्रभावित कर सकते है. बिना भागवत और सत्संग के ज्ञानी होने का कोई अर्थ नहीं. ज्ञानी में यदि आस्तिकता की कमी है तो विद्घतता अभिशाप है. परमात्मा प्राप्ति ही अहसास का विषय है. परमात्मा को कही ढूंढने की जरूरत नहीं है, तुम्हारे होने का मतलब ही परमात्मा का अस्तित्व है. साध्वी कनकेश्वरी ने नैमीशारण्य का महत्व बताते हुये कहा कि इस दुनिया में यदि तुम धर्म अध्यात्मक और भजन के भरोसे हो तो एक पल में ही बेड़ापार हो सकता है. उन्होंने कलयुग के प्रताप पर प्रकाश डालते हुये कहा कि कलि के लक्षण में व्यक्ति दूसरे के काम का यश स्वयं प्राप्त करना चाहता है. यह कल युग का लक्षण है. उन्होंने कहा कि संसार में जड़ और चेतन दो ही वस्तुए हैं इसलिये हमें जड़ का सदुपयोग और चेतन का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिये. लेकिन लोग जब इसका उल्टा कर लेते हैं तब उन्हें जीवन में परेशानी होती है.

भागवत कथा के आरंभ में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र सिंह तोमर, उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायकगण रमेश मेंदोला, संजय पाठक, जितेन्द्र डागा, गुरुप्रसाद शर्मा, कैलाश नारायण सारंग, विश्वास सारंग, अशोक जैन भागा, डा. के.पी.के. शुक्ला, संजय शर्मा, जीतू पाटीदार, मनोज मिश्रा, वीरेंद्र पाठक, अजय श्रीवास्तव नीलू, शंकरलाल साबू, रवि गगरानी, चेतन गिरी आदि ने व्यासपीठ की पूजन आरती की और माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया. इस अवसर पर वरिष्ठï समाज सेवी पं. ओम मेहता और सुप्रसिद्घ इतिहाविद्ï सुरेश मिश्रा को सम्मानित किया गया.

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