नई दिल्ली, 18 अप्रैल. टाट्रा ट्रकों की खरीद में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को दिल्ली व नोएडा में दो पूर्व सैन्य अधिकारियों के आवासों की तलाशी ली और वहां से इस घोटाले से सम्बंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए. सीबीआई सूत्रों ने बताया कि ब्रिटेन के वेक्ट्रा समूह के एक अधिकारी के घर की भी तलाशी की गई है. वेक्ट्रा समूह रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के जरिए भारतीय सेना को टाट्रा ट्रकों की आपूर्ति करता है.

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) पी.सी. दास व नोएडा में कर्नल (सेवानिवृत्त) अनिल दत्ता के आवास की तलाशी ली गई. वेक्ट्रा कर्मचारी अनिल मंसारमानी के आवास की भी तलाशी ली गई. सूत्रों के अनुसार सीबीआई अधिकारियों के तीन दलों ने बुधवार तड़के से ही तलाशी शुरू कर दी थी. सूत्रों का दावा है कि तलाशी के दौरान मिले महत्वपूर्ण दस्तावेज टाट्रा खरीद घोटाले की जांच में मददगार हो सकते हैं. सीबीआई ने एक दिन पहले ही तीन लोगों से इस मामले में पूछताछ की थी. इनमें बीईएमएल के निदेशक वी. मोहन, कम्पनी के वर्तमान प्रमुख वी.आर.एस. नटराजन व वेक्ट्रा समूह के प्रमुख रविंदर ऋषि शामिल थे. तीनों से टाट्रा ट्रक की आपूर्ति में कथित खामियों के सम्बंध में पूछताछ की गई.
टाट्रा का निर्माण चेक गणराज्य में होता है. ब्रिटेन की वेक्ट्रा कम्पनी इसकी मालिक है, जो ट्रक के कलपुर्जे बीईएमएल को देती है. बीईएमएल ट्रक तैयार करती है और उन्हें सेना को बेचती है. सेना ने 1986 से अब तक 7,000 टाट्रा ट्रकों की खरीददारी की है. सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने कथित घोटाले से पर्दा उठने के बाद मार्च में आरोप लगाया था कि उन्हें घटिया टाट्रा ट्रक की आपूर्ति के लिए सौदे को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी.

सेना ने पांच मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी, जिसमें टाट्रा व बीईएमएल का नाम लिया गया था.  इसमें आरोप लगाया गया था कि टाट्रा व वेक्ट्रा की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तेजिंदर सिंह ने कथिततौर पर रिश्वत की पेशकश की थी. सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि बीईएमएल ने 1997 से टाट्रा ट्रकों में लगने वाले कलपुर्जो की खरीद एक निजी कम्पनी टाट्रा सिपॉक्स (ब्रिटेन) से क्यों शुरू की जबकि 1986 से ही ये उपकरण ओमनीपोल (चेक गणराज्य में राज्य स्वामित्व वाली इकाई) से खरीदे जाते रहे हैं. सूत्रों ने कहा कि सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बीईएमएल अधिकारियों ने 14 जून, 1997 को बेंगलुरू में टाट्रा सिपॉक्स (ब्रिटेन) के साथ जल्दबाजी में खरीद समझौता क्यों किया. इसके तीन दिन बाद वे स्लोवाकिया में टाट्रा सिपॉक्स व उसकी सहयोगी कम्पनियों के अधिकारियों से मिले थे. एक अन्य कम्पनी वीनस प्रोजेक्ट्स लिमिटेड भी सीबीआई की जांच के घेरे में है. इस कम्पनी में कथिततौर पर ऋषि की कुछ हिस्सेदारी है. ऋषि ने टाट्रा ट्रक्स के लिए स्पेयर पार्ट्स खरीदने के लिए कथिततौर पर इस कम्पनी का इस्तेमाल किया था.

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