वित्त मंत्रालय और आभूषण विनिर्माताओं के बीच खींचतान मई के पहले हफ्ते में और बढ़ सकती है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आभूषण विनिर्माताओं को सोने पर बढ़ाए गए उत्पाद शुल्क पर दोबारा विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोने के गैर-ब्रांडेड आभूषणों पर प्रस्तावित उत्पाद शुल्क को वापस लिए जाने की संभावना से इनकार कर दिया।

नई दिल्ली.  प्रस्तावित शुल्क बेहद कम है और मंत्रालय इस बारे में आभूषण विनिर्माताओं को स्पष्टीकरण दे चुका है। बजट में वित्त मंत्री ने गैर-ब्रांडेड आभूषणों पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था। उत्पाद शुल्क वापस नहीं लिए जाने का मंत्रालय का कदम आभूषण विनिर्माताओं को बड़ा झटका है। 16 मार्च को बजट पेश किए जाने के बाद से आभूषण विनिर्माताओं ने 21 दिन तक हड़ताल की थी, जिसमें 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार की चपत लगी और कर संग्रह में 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पिछले हफ्ते वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद ही आभूषण विनिर्माताओं ने हड़ताल वापस ली थी।

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण व्यापार संघ के चेयरमैन बछराज बामलवा ने कहा, मंत्रालय दो पक्षों में बंटा हुआ है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाला विभाग उत्पाद शुल्क बढ़ोतरी को वापस लेने के पक्ष में है, जिससे मुखर्जी भी सहमत हैं। दूसरा पक्ष नौकरशाहों का है, जो सरकार को अच्छी साख वाले आभूषण विनिर्माताओं पर भी उत्पाद शुल्क लगाने की सलाह दे रहा है। हम यही जानते हैं कि वित्त मंत्री हमारे तर्कों से सहमत दे और उन्होंने हमसे वित्त विधेयक में इस बढ़ोतरी को वापस लेने का आश्वासन दिया था।’ बामलवा ने कहा, ‘आभूषण विनिर्माता वित्त विधेयक के पेश होने तक इंतजार करेंगे। उत्पाद शुल्क वापस नहीं लिए जाने की सूरत में विरोध प्रदर्शन दोबारा शुरू किया जाएगा।

अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि छोटे कारोबारियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। यह वस्तु एवं सेवा कर की दिशा में बढ़ाया गया कदम है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्र्घन परिषद के चेयरमैन राजीव जैन कहते हैं, वित्त मंत्री खुद इस मामले को देखने का आश्वासन दिया था। हमें वित्त विधेयक पारित होने तक इंतजार करना होगा।

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