इस साल मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शिक्षकों का सही सम्मान किया है. गुरुजियों के मानदेय में 1100 रुपये की वृद्धि कर दी. अभी तक 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर सभा समारोह करके कुछ शिक्षकों को राज्य कुछ को राष्टपति सम्मान से नवाजा जाता रहा. लेकिन इस बार उसे आर्थिक रूप से सम्मानित किया गया है.

गुरुजियों की वेतन वृद्धि की मांग हमेशा से चलती रही है. एक समय राजधानी भोपाल में उन्होंने कई दिनों तक टी.टी. नगर की मुख्य सड़क को 'जाम' रखा था. इस बार उन शिक्षकों की सुध ली गई है जो पृथक से ली गई परीक्षा में असफल रहने से संविदा शाला शिक्षक श्रेणी पद पर नियुक्त नहीं हो सके थे. यही शिक्षक वर्ग सर्व शिक्षा अभियान में प्राथमिक शालाओं के प्रोन्नत शिक्षा गारंटी स्कूलों में कार्यरत् हैं. अब इन्हें गत एक अप्रैल 2012 से प्रभावी 3600 रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिला करेगा.

अब यह शिक्षकों का भी दायित्व है कि वे सर्वशिक्षा अभियान में सभी बच्चों को जोड़कर इस अभियान और शिक्षा का अधिकार कानून को सफल व सार्थक बनाएं. कानून की सही वैधता व उपयोगिता इसी में है कि वह मैदानी स्तर पर लागू हो गया. आज भी बहुत से बच्चे काम में लगे देखे जा रहे हैं जो स्कूल नहीं जा रहे हैं. राज्य सरकार के श्रम विभाग पर यह जिम्मेवारी है कि वह बाल श्रम खत्म करेगा. श्रम विभाग को बाल श्रमिक प्रथा को खत्म करके बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में शिक्षा विभाग व सर्व शिक्षा अभियान में सक्रिय योगदान देना चाहिए.

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