नई दिल्ली 12 सितंबर. अन्ना हजारे पक्ष और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य अरुणा रॉय के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. हजारे पक्ष ने सोमवार को अरुणा के नेतृत्व वाले एनसीपीआरआई को न्यायिक जवाबदेही विधेयक के मुद्दे पर निशाना बनाया.

हज़ारे पक्ष के अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनसीपीआरआई, सरकार और कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने इस बात की वकालत की कि लोकपाल के दायरे में न्यायपालिका को शामिल नहीं किया जाए. सरकार ने पूरे देश को गुमराह किया लेकिन हम यह जानना चाहते हैं कि क्या एनसीपीआरआई ने इस विधेयक पर गौर कर चुकी स्थाई समिति के समक्ष दबाव डालते हुए अपने विचार रखे थे.

अरुणा रॉय के नेतृत्व वाले नेशनल कैम्पेन फॉर पीपुल्स राइट टू इन्फॉर्मेशन (एनसीपीआरआई) को हज़ारे के साथी कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने भी आड़े हाथ लिया.   भूषण ने कहा कि एनसीपीआरआई ने लोकपाल के दायरे में न्यायपालिका को शामिल करने का यह कहते हुए विरोध किया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कोई स्वतंत्र निकाय होना चाहिए. लेकिन संगठन ने यह स्प्ष्ट नहीं किया कि किस तरह का स्वतंत्र निकाय बनना चाहिए. इस मुद्दे पर हमारे विचार एनसीपीआरआई से पूरी तरह अलग हैं.  बहरहाल, भूषण इस सवाल का जवाब टाल गए कि क्या हज़ारे पक्ष के अहम सदस्य एनसीपीआरआई के अभियान का मुख्य हिस्सा नहीं रहे हैं.

गौरतलब है कि हज़ारे पक्ष और अरुणा रॉय के बीच लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर भी आरोप प्रत्यारोप हुए हैं. अरुणा ने केजरीवाल के रविवार को रालेगण सिद्धी में दिए गए बयान पर सोमवार को आपत्ति जताई.

अरुणा ने कहा कि मैंने कभी यह आरोप नहीं लगाया कि टीम अन्ना ने इस मुद्दे पर हमारे (एनसीपीआरआई के) साथ कोई विचार विमर्श नहीं किया. दरअसल एनसीपीआरआई ने बातचीत में शामिल होने से कभी इनकार नहीं किया. केजरीवाल ने खुद कहा है कि तीन दौर की बातचीत हुई है इसलिए यह आरोप गलत है कि हमने बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया था.

अरुणा ने 11 सितंबर को अखबारों में आए इस बयान पर भी गहरी आपत्ति जताई है, जिसमें केजरीवाल के हवाले से कहा गया है कि जब हम अरुणा से मिलने वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के घर गए तो उन्होंने हमें दरवाजे से यह कहकर लौटा दिया कि वह मुझसे बातचीत नहीं करना चाहतीं.

उन्होंने एनसीपीआरआई के अपने सहयोगी निखिल डे के साथ जारी संयुक्त बयान में कहा कि नैयर ने उन्हें निजी मुलाकात के लिए आमंत्रित किया था जहां उन्होंने न्यायमूर्ति रच्जिंदर सच्चर, मेधा पाटकर और संभवत: प्रशांत भूषण को भी बुलाने की बात कही. जब हमें पता चला कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन से भी कुछ लोग आ रहे हैं तो हमने नैयर के सामने स्पष्ट कर दिया कि इस मुलाकात में लोकपाल पर चर्चा नहीं होगी क्योंकि यह मित्रवत बैठक है.

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