बेंगलुरू 29 मार्च. पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने कहा है कि भारतीय टीम में अब बदलाव की जरूरत है क्योंकि टीम में एक नया नेतृत्व उभर चुका है जो अपनी और भावी पीढ़ी के बीच एक सूत्र का काम कर सकता है.

द्रविड़ ने कहा, टीम के अनुभवी खिलाडिय़ों महेद्र सिंह धोनी, वीरेंद्र सेहवाग, जहीर खान, गौतम गंभीर और हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ी लंबे समय से टीम का हिस्सा हैं और अब यह इन सभी की जिम्मेदारी है कि वे टेस्ट टीम में बदलाव में अहम भूमिका निभाएं और युवाओं को मौका दें. टीम के सबसे वरिष्ठ खिलाडिय़ों में से एक द्रविड़ ने महीने की शुरूआत में ही अंतर्राष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी. भारतीय टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी रहे द्रविड़ ने कहा, टीम के वरिष्ठ खिलाडिय़ों को आगे आना चाहिए.

खिलाडिय़ों के तौर पर नहीं बल्कि एक मेंटर, एक प्रशिक्षक के रूप जो टीम यह निर्णय करें कि टीम को किस तरह से चलाना है. टीम की छवि कैसी होनी चाहिए और वह टीम के लिए खेल के किस प्रारूप को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं. हाल ही के कुछ वर्षों में टीम में बदलाव का हिस्सा बने द्रविड़ ने कहा कि भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसे इस बात पर गौर करना चाहिए कि युवा खिलाडिय़ों पर ट्वेंटी-20 और आईपीएल का कितना प्रभाव पड़ रहा है.  उन्होंने कहा, ट्वेंटी-20 का प्रारूप ऐसा नहीं है जिससे हमें घबराने की जरूरत है, लेकिन हमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि इसका खिलाडिय़ों पर क्या और कितना प्रभाव है?  हमें यह सोचना चाहिए कि हम इससे निपटने के लिए क्या तरीके अपनाएं जिससे मैदान के बार सहजता से परिवर्तन किए जा सकें.  पूर्व भारतीय खिलाड़ी द्रविड़ ने कहा, टीम में बदलाव के लिए हर स्तर पर एक नयी सोच और नये नेतृत्व की जरूरत होगी. इससे मेरा आशय यह बिल्कुल नहीं है टीम के वरिष्ठ खिलाडिय़ों की जगह नये चेहरों को टीम में जगह दी जाए बल्कि उन्हें टीम में अनुभवी खिलाडिय़ों की तरह प्रशिक्षक की भूमिका निभाने की जरूरत है. हालांकि मैं मानता हूं कि टीम की दस वर्षों के बाद क्या स्थिति होगी यह टीम के बेहतरीन युवा खिलाडिय़ों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए.

भारतीय टीम की दीवार, के नाम से मशहूर बल्लेबाज ने कहा, टीम को उसकी सामान्य स्थिति में चलते रहने की बजाय इससे जुड़े खिलाडिय़ों, टीम के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े सभी लोगों को टीम में एक बेहतर बदलाव के लिए कदम उठाने चाहिए. पिछले करीब आठ महीनों से टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के बारे में पूछने पर पूर्व बल्लेबाज ने कहा, इस तरह की चुनौतियां कोई नयी नहीं हैं. इस तरह की परेशानियां हमेशा से ही टीम का हिस्सा रही हैं. टीम के लिए चाहे तेज गेंदबाज ऑलराउंडर, ओपनिंग बल्लेबाज ढूंढने की बात हो या तेज गेंदबाज की यह आम चुनौतियों जैसा है. इन्हें बिना किसी परेशानी के आसानी से हल किया जा सकता है. मैं इन चीजों को लेकर कभी चिंतित नहीं होता था। भारतीय टीम के कई सकारात्मक पहलू हैं.

गौरतलब है कि वर्ष 2000 में भारतीय क्रिकेट में मैच फिक्सिंग के सामने आने के बाद द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, सौरभ गांगुली, जवागल श्रीनाथ और वी.वी.एस लक्ष्मण जैसे खिलाडिय़ों ने टीम को संभालने की जिम्मेदारी उठाई थी. ऐसे में ये सभी खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे सफल और प्रभावशाली बन कर सामने आए. द्रविड़ ने कहा, टीम के लिए यह एक बड़ा ही खराब अनुभव था. उस समय हम मैच फिक्सिंग की स्थिति से उबरे थे और मैच फिक्सिंग के कारण हम किसी पर भरोसा नहीं कर सकते थे. उस समय हमारे सामने इस तरह की परेशानियां थी, लेकिन अब दस वर्ष के बाद टीम में कई अन्य तरह की चुनौतियां हैं.

द्रविड़ ने कहा कि इंग्लैंड के हाथों टेस्ट शृंखला में मिली 0-4 से हार और बाद में ऑस्ट्रेलिया में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद खिलाडिय़ों पर खुद को साबित करने का काफी दबाव था कि वे सिर्फ एकदिवसीय में ही अच्छी टीम नहीं है और टीम प्रशासन टेस्ट क्रिकेट को लेकर कितना गंभीर है.उन्होंने कहा, हम सभी लगातार सुन रहे थे कि आईपीएल भारतीय टीम को किस कदर प्रभावित कर रहा है. टीम का हर खिलाड़ी सिर्फ इसी टूर्नामेंट में खेलने का इच्छुक है और इससे हमारा टेस्ट क्रिकेट गर्त में जा रहा है, लेकिन मुझे यकीन है कि टीम के युवा खिलाड़ी इस भ्रम को जल्द ही खत्म कर देंगे. पूरी गंभीरता के साथ पूर्व कप्तान ने कहा, हमारे लिए जरूरी है कि अभी से इस बात पर विचार करें की दस वर्षों के बाद हम भारतीय टीम को किस स्थिति में देखना चाहते हैं. भारतीय टीम के धुरंधर बल्लेबाज के रूप में हाल ही में उभरे विराट कोहली को जहां एक ओर बल्लेबाजी क्रम में द्रविड़ का विकल्प कहा जा रहा है वहीं खुद द्रविड़ का मानना है कि अभी फिलहाल कोहली को प्रदर्शन में सुधार करने और लगातार अच्छा खेलने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.

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