उधर, शरद यादव पर टिप्पणी नेताओं को रास नहीं आई

नई दिल्ली, 26 मार्च. दोपहर 2 बजे के बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई पूरा सदन टीम अन्ना पर टूट पड़ा.

सत्ता पक्ष और विपक्षी दोनों सांसदों ने टीम अन्ना द्वारा संसद सदस्य शरद यादव के खिलाफ  अपमान जनक शब्द कहे जाने की कड़ी निंदा की. शरद यादव इस बारे में सर्वदलीय प्रस्ताव लाने वाले हैं. इस बीच टीम अन्ना ने बयान पर माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा है कि बयान में कुछ भी गलत नहीं है और अगर संसद इस बयान के लिए कोई सजा देती है तो वह सजा भुगतने के लिए तैयार है.

शरद यादव लाएंगे सर्वदलीय प्रस्ताव

लोकसभा में शरद यादव के खिलाफ टीम अन्ना के कथित अपमानजनक बयान का सभी दलों ने विरोध किया. इस मसले पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सदस्य एक साथ खड़े नजर आए. सबका कहना था कि संसद और सांसदों के खिलाफ इस तरह का बयान देना लोकतंत्र का अपमान है. खबर है कि शरद यादव इस मामले में एक सर्वदलीय प्रस्ताव लाने वाले हैं.

अपने सदस्यों को रोकें अन्ना-यह मामला विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उठाया और कहा कि टीम अन्ना की ओर से जिस तरह सांसदों के प्रति अमर्यादित (भाषा) का इस्तेमाल किया गया है उसका पूरा सदन निंदा करता है.

विदेशी षडयंत्र –कांग्रेस के संजय निरपम ने शरद यादव की हां में हां मिलाते हुए कहा कि अब यह सिद्ध हो गया है कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध नहीं बल्कि लोकतंत्र, संसद और राजनीतिक जमात के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि इस बात की छानबीन होनी चाहिए कि कहीं यह आंदोलन तेजी से तरक्की कर रहे भारत को अस्थिर करने के लिए कोई विदेशी षडयंत्र तो नहीं है.

टीम अन्ना का मकसद क्या है

माक्र्सवादी वासुदेव आचार्य ने कहा कि यह किसी एक सदस्य का नहीं, बल्कि संसद की मर्यादा का सवाल है और इसकी एक स्वर से निंदा की जानी चाहिए. समाजवादी पार्टी के शैलेंद्र कुमार ने कहा कि टीम अन्ना के सदस्य संसद और संविधान पर हमला कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि हमें संसद की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए . इस बात की जांच होनी चाहिए कि टीम अन्ना का असली मकसद क्या है.

अन्ना के निशाने पर ये हैं 14 मंत्री

टीम अन्ना ने अब केंद्रीय मंत्रियों को सीधे निशाने पर लिया है. 14 मंत्रियों का नाम लेते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में अगस्त तक एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. ऐसा न होने पर पूरे देश में जेल भरो आंदोलन चलाने की चेतावनी दी है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार चाहती ही नहीं कि मजबूत लोकपाल बिल आए क्योंकि अगर मजबूत लोकपाल आया तो उनके कई मंत्री जेल में होंगे. उन्होंने 14 मंत्रियों के नाम गिनाए- पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल, शरद पवार, एस.एम. कृष्णा, प्रफुल्ल पटेल, अजित सिंह, फारुक अब्दुल्ला, जी.के. वासन, कमलनाथ, श्रीप्रकाश जायसवाल, सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख, एम.के. अलागिरी और वीरभद्र सिंह. केजरीवाल ने कहा कि 162 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 20 तो हत्या की कोशिश के केस हैं. लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, ए. राजा और कनिमोझी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं. क्या ऐसी संसद लोकपाल बिल पास करेगी? क्या ऐसी संसद भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के खिलाफ कानून बनाएगी? राज्यों में भी हालत अच्छी नहीं है.

केजरीवाल ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर छह महीने में सांसदों के खिलाफ मामलों की जांच करवाने की मांग की. टीम अन्ना के मेंबर मनीष सिसौदिया ने चिदंबरम और सिब्बल पर आंदोलन को कुचलने का आरोप लगाया. अन्ना ने कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है लेकिन हम लोकपाल बिल लेकर रहेंगे. 2014 के चुनाव से पहले सरकार के पास दो विकल्प हैं- लोकपाल लाओ या जाओ. हमें अब सरकार को कोई पत्र नहीं लिखना, न ही इनके पीछे घूमना है. उन्होंने कहा कि अब हम और बाबा रामदेव मिलकर आंदोलन करेंगे. किरन बेदी ने कहा कि अगले साल दिल्ली में चुनाव हैं. हमें राजधानी में महत्वपूर्ण लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा. उसी पार्टी को चुनना, जो मजबूत लोकायुक्त कानून लाए. अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों (विसिल ब्लोअर्स) को संरक्षण देने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक अनशन किया. इस दौरान जंतर-मंतर पर तीन हजार से ज्यादा लोग जुटे.

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