• आतंकियों की मदद करना छोड़े पाक

वाशिंगटन, 1 दिसंबर. नाटो हमले के बाद अमेरिका और पाकिस्तान में तल्खी बढ़ती ही जा रही है। अमेरिका ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसकी जमीन से भारत पर हमला किया गया तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।

पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूज और नाटो सेना प्रमुख माफी मांग चुके हैं। बराक ओबामा के शीर्ष सलाहकार रहे रिटायर्ड जनरल जेम्स जोंस ने कहा कि पाक आतंकियों की मदद करना छोड़ दें। उन्होंने कहा कि इसको लेकर पाक को कई बार आगाह किया गया है। लेकिन फिर भी पाक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अमेरिका ने साफ शब्दों में कह दिया है कि नाटो हमले को लेकर राष्ट्रपति बराक ओबामा माफी नहीं मांगेंगे। इस मामले को लेकर पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय खेद प्रकट कर चुका है। भारत-यूएस के खिलाफ जिहाद की धमकी-जेम्स का यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान की धरती से आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ धमकी दे रहे है। मुंबई पर आतंकी हमला करने के आरोपी और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात उद दावा (जेयूडी) का कहना है कि वह पाकिस्तान को तालिबानी राष्ट्र बना देंगे। जेयूडी ने भारत और अमरीका के खिलाफ जिहाद की धमकी दी है। जेयूडी ने धमकी दी है कि पाकिस्तानी युवाओं को अभ्यास देकर अमेरिका और भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ा जाएगा।

फिर हमला किया तो खैर नहीं : हिना रब्बानी

दूसरी ओर पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार उनके देश के किसी भी नागरिक तथा सैनिक पर किए जाने वाले हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगी। आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान की भूमिका को उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका को दिया जाने वाला अपना समर्थन वापस ले सकता है। नाटो हमले में पाकिस्तान के 24 सैनिकों के मारे जाने के अमेरिका और पाक के बीच तनातनी बढ़ गई है।

अमेरिका माफी मांगे, वरना खाने को तरस जाएंगे सैनिक: पाक

इसलामाबाद पाक सैन्य चौकी पर नाटो हमले के विरोध में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ता ही जा रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार ने साफ किया है कि अमेरिका नाटो सेना के हमले पर माफी मांगनी ही होगी। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो अफगान में अंतरराष्ट्रीय सेना के लिए खाद्य और अन्य सामग्री की आपूर्ति पर रोक लगी रहेगी। हर फौजी का खून कीमती मुख्तार ने गरजते हुए कहा कि खून सैनिक हो या किसी आम नागरिक का, हर किसी का समाना होता है। पाकिस्तानी फौजी का खून भी उतना कीमती है जितना नाटो या अमेरिका के किसी सैनिक का।

नाटो ने जानबूझकर किया हमला
इधर पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यह हमला नाटो की एक सोची समझी कार्रवाई थी। इस हमले को लेकर पाकिस्तान में फैल रही गुस्से की लपटों को और तेज करते हुए सैन्य अभियान प्रमुख मेजर जनरल इसफाक नदीम ने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में संपादकों से बातचीत के दौरान अपने बयान में कहा कि नाटो बलों को सतर्क किया गया था कि वे पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर हमला कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे चौकी पर गोलीबारी करते रहे।

निरंकुश आक्रामकता है नाटो की कार्रवाई
उन्होंने कहा, नाटो के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल के पास इस चौकी के बारे में विस्तृत जानकारी थी और यहां तक की उनके पास इसका मानचित्र भी था। ऐसे में यह मानना नामुमकिन है कि उन्हें यह पता नहीं था कि यह हमारी सैन्य चौकी है। उन्होंने कहा कि नाटो के हमले से सहयोग प्रणआली का उल्लंघन हुआ है, यह कार्रवाई नाटो की निरंकुश आक्रामकता को दर्शाती है। मेजर जनरल नदीम ने बताया कि रात के सवा बारह बजे के करीब नाटो के हेलीकाप्टर अफगानिस्तान की ओर से आए और उन्होंने चौकी पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी और फिर लौट गए। वापस जाने के करीब 45 मिनट बाद वे फिर से आए और लगभग एक घंटे तक फिर से गोलीबारी की।

रसद आपूर्ति के रास्ते बंद
गौरतलब है कि गत शनिवार को पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर नाटो के हवाई हमले में 25 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। इस घटना से तिलमिलाए पाकिस्तान ने कुछ घंटे बाद ही अफगानिस्तान में नाटो बलों के लिए रसद आपूर्ति के रास्ते बंद कर दिए थे और इस मामले को अमेरिका तथा नाटो के समक्ष गंभीरता से उठाया था। बाद में पाकिस्तान ने 15 दिन के अंदर अमेरिका को शम्सी एयरबेस खाली करने का नोटिस भी भेजा है। इतना ही नहीं पाक ने नाटो हमले पर विरोध जताते हुए संयुक्त राष्ट्र को भी पत्र लिखा है। हालांकि नाटो ने इस मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है।

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