राज्य के लिये यह अवश्य ही बड़ी उपलब्धि है कि बुदनी के पास 3600 करोड़ रुपयों की लागत से एकीकृत टेक्सटाइल काम्पलेक्स बनने जा रहा है. इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोन्टेक सिंह अहलूवालिया ने एक लाख 74 हजार स्पिन्डल क्षमता की नवनिर्मित इकाई को भी प्रारंभ किया. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का यह गृह क्षेत्र है. नर्मदा तट समीप है तो यहां औद्योगिक विकास को पानी की कमी भी नहीं रहेगी. श्री चौहान की यह घोषणा स्वागत योग्य है कि उद्योगों को उपजाऊ भूमि के अलावा जो इतर भूमि होगी वही दी जायेगी, जिससे उपजाऊ जमीन खत्म न हो.

टेक्सटाइल (कपड़ा मिलों) के बारे में देश में एक बड़ी विचित्र स्थिति आई थी. कभी मुम्बई- अहमदाबाद, चेन्नई, कानपुर में बहुतायत कपड़ा मिलों के कारण इन्हें टेक्सटाइल नगर की पहचान के साथ देश में इंदौर व उज्जैन की भी एक जबरदस्त पहचान थी. इतनी बड़ी आबादी के देश में कपड़ा की हमेशा से बहुत तेज मांग रही है. पावरलूम व हैंडलूम के बुरहानपुर जैसे शहर थे, लेकिन जाने क्या हुआ कि देश की बड़ी-बड़ी टेक्सटाइल मिलें धड़ाधड़ घाटे में चलकर बंद होने लगीं. सरकार को ‘सिक मिल’ की नीति बनाकर उन्हें एन.टी.सी. (नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन) बना कर खुद चलना पड़ा. इसके बाद भी वे घाटे में रहीं तो बंद कर उसके परिसर नीलाम कर दिये गये. इंदौर, उज्जैन की कपड़ा मिलों के परिसर भी बिक गये. मुंबई में भी इन मिलों के परिसर नीलाम कर दिये गये.

राज्य शासन को इस बात पर विचार करना चाहिये कि राज्य में इंदौर, उज्जैन व बुरहानपुर में मिलों के परिसरों में पुन: नये सिरे से आधुनिकतम कपड़ा मिलों की स्थापना कराये. इससे किसी नई भूमि को भी नहीं लेना पड़ेगा. मध्य प्रदेश का निमाड़ क्षेत्र कपास में बहुत संपन्न है. पूरे राज्य को ही टेक्सटाइल के नक्शे पर पुन: लाना चाहिये. इन दिनों भारत से काफी मात्रा में कपास, कपड़ा व रेडीमेड गारमेंट का निर्यात व्यापार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. हमारा सबसे ज्यादा कपास तो चीन खरीद कर वहां टेक्सटाइल्स उद्योग बहुत बढ़ा रहा है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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