नई दिल्ली, 12 जुलाई. भारत के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे में गड़बड़ी की शिकायतों से रक्षा मंत्रालय में हड़कंप मचा हुआ है. 126 लड़ाकू विमान सौदे के लिए फ्रांसीसी विमान राफेल के चुनाव की प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लग गए हैं.

इसके बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस सौदे के लिए चल रही मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पूरा होने के बाद इस पर नए सिरे से विचार करने का फैसला किया है. रक्षा मंत्री ने साफ किया है कि यदि इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो इसको रद्द भी किया जा सकता है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस सौदे पर केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा गठित तीन सदस्यों वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को इसे नए सिरे से देखने को कहा. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने सौदे के लिए बोलीकर्ता फ्रेंच कंपनी दासौ एविएशन के साथ बातचीत फिलहाल जारी रखने का फैसला किया है.

इस कवायद में अभी एक माह का समय लगेगा. इस लड़ाकू विमान सौदे में गड़बड़ी की शिकायत पूर्व सांसद एमवी मैसूरा रेड्डी ने भी की थी. इसके जवाब में गत 3 जुलाई को लिखे पत्र में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने क

हा कि कांट्रैक्ट नेगोशिएटिंग कमेटी की रिपोर्ट अंतिम हो जाने और सौदे पर अगला कदम बढ़ाने से पहले कमेटी एल-1 के चुनाव में अपनाई गई प्रक्रिया पर रक्षा वित्ता विभाग और मंत्रालय पुनर्विचार करेगा. ताकि यह पता लगाया जा सके कि खरीद में सही और तर्कसंगत प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं? एंटनी ने इस दौरान मैसूरा रेड्डी की ओर से उठाए गए सवालों पर भी गौर करने का भरोसा दिया है. रक्षा मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर रक्षा सौदों के किसी भी चरण में कोई गड़बड़ी या जोड़-तोड़ की कोशिश सामने आती है तो सरकार उसे रद करने से भी नहीं हिचकेगी. वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमान खरीदने की कवायद चल रही है.

दुनिया के बड़े लड़ाकू विमान सौदों में शामिल इस सौदे के लिए बीते दिनों यूरोपीय देशों की संयुक्त कंपनी ईएडीएस के यूरोफाइटर और फ्रांस की दासौ कंपनी के राफेल में राफेल का चुनाव किया था. गौरतलब है कि सेना के लिए 197 हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद पर भी तलवार लटकी है. दौड़ से बाहर हुई इतालवी कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड ने आरोप लगाया था कि सौदे में खास तौर पर यूरोकॉप्टर को फायदा पहुंचाने के लिए तकनीकी परीक्षण में रियायतें दी गई हैं. इसके बाद अनियमितता की शिकायत पर एक समिति का गठन हुआ, जिसने अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप दी है. इस पर अब रक्षा खरीद परिषद को फैसला करना है.

zp8497586rq

Related Posts: