सतना, 2 अक्टूबर. विंध्य की वादियां आज भी डकैतों के बूट से गूंज रही हैं. ददुआ और ठोकिया जैसे खतरनाक डकैतों के मारे जाने के बाद भी यहां आधा सैकड़ा डकैत सक्रिय हैं, जिनमें दो खूंखार डकैत सुंदर और बलखडिय़ा है. तराई में मौजूदा समय में डकैत अब जातिगत गिरोह बनाने की जुगत में लगे हैं. ऐसी स्थिति में गैंगवार की संभावना बढ़ती जा रही है.

दो लाख रुपए से अधिक का इनामी डकैत सुन्दर उर्फ रागिया उत्तर प्रदेश के पतमनियां गांव का रहने वाला है. बलखडिय़ा उर्फ सुरेश भी वहीं का रहने वाला है. सुन्दर पटेलों और चौधरियों को जोड़ रहा है तो बलखडिय़ा मवालियों का, दोनों के साथ वर्तमान समय में 10 से 12 लोग है. रामसिंह डकैत और खरदूषण दोनों क्रमश: मध्यप्रदेश के नयागांव चित्रकूट और मझगवां थाना के बिछियन गांव के रहने वाले हैं. दोनों गौड़ जाति के है. रामसिंह ठोकिया की गैंग में था और खरदूषण ददुआ का दाहिना हाथ माना जाता था. अब ये दोनों डकैत भी अपना- अपना मुकाबले गिरोह तैयार कर रहे हैं.

एक अन्य डकैत राजेश मवासी है, जो मवासियों को जोड़कर तराई में अपना काम करना चाहता है. राजेश सतना जिले के मडुलिहाई का बाशिंदा है. उसके साथ एक ब्राह्मïण भी है.पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूरे डकैतों की लम्बी फेहरिस्त है. इनके द्वारा उ.प्र. और म.प्र. में अपराध किए जाते हैं. पन्ना- छतरपुर का इलाका इनके लिए महत्वपूर्ण है.

  • देवांगना घाटी में अड्डा

पूरे डकैतों का मुख्य अड्डा चित्रकूट का हनुमानधारा वाला इलाका है. यहां पर देवांगना घाटी है, जहां पर सभी एकत्रित होते रहते हैं. यदि डकैतों का गिरोह उ.प्र. में चलता है तो पहले देवांगना चित्रकूट आते हैं फिर सती अनुसूईया के किनारे-किनारे होकर, गुप्त गोदावरी, हरदुआ, बरौंधा, किल्लौहरा उसके बाद बगदरा घाटी और फिर झरी पिण्ड्रा के बीच निकलकर पुतरीचुआ महतैन होकर यह लोग पन्ना- छतरपुर निकल जाते हैं. जहां बृजपुर का घना जंगल एवं इलाके की अवैध हीरा खदानें इनकी पनाहगार हैं. उधर, कल्याणपुर होकर धारकुण्डी, प्रतापपुर होकर डभौरा, रीवा पहुंचते है.

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