भोपाल, 25 अप्रैल, नभासं. मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान ने घोषणा की कि 30 अप्रैल तक म.प्र. को गेहूं भरने के लिये पर्याप्त मात्रा में बारदाने नहीं मिले तथा प्लास्टिक के बैगों में गेहूं भरने की अनुमति नहीं दी गई तो वे सांसदों के साथ संसद भवन के समक्ष केंद्र सरकार का ध्यानाकर्षित करने के लिये बैठेंगे.

दिल्ली में केन्द्रीय खाद्य मंत्री से मुलाकात कर राजधानी लौटे मुख्यमंत्री  ने आज रात पत्रकारों से   कहा कि म.प्र. को गेहूं के 3 लाख 19 हजार बारदानों की आवश्यकता है. किन्तु म.प्र. को 24 अप्रैल तक 88000 गठानों में से 17 हजार गठाने प्राप्त हुईं हैं.  शुरूआत में डीजीएस एंड डी द्वारा 15 मार्च तक 1,56000 गठानों का प्रदाय किया तथा केंद्र द्वारा राज्य सरकार को आश्वस्त किया गया कि जैसे-जैसे खरीदी बढ़ेगी वैसे-वैसे शेष 1,14000 गठानें अप्रैल-मई माह में उपलब्ध कराईं जायेंगी. चौहान ने बताया कि राज्य शासन ने भारत सरकार से निवेदन किया था कि हमें एक बार उपयोग में लाये गये बारदानों का पुन: उपयोग करने की अनुमति दें तथा जूट बारदानों की अनुपलब्धता के कारण एचडीपीई प्लास्टिक बैग के उपयोग की अनुमति दें किन्तु एक सप्ताह व्यतीत होने के बावजूद ये अनुमतियां प्राप्त नहीं हुईं हैं.

राज्य सरकार ने गठानों एवं बारदानों के लिये 565 करोड़ 34 लाख 32 हजार रुपये केंद्र सरकार के पास जमा करा दिया था.  बारदानों की कमी के कारण गेहूं खरीदी व्यवस्था गड़बड़ïा गई है. जबकि इस वर्ष मध्यप्रदेश में पंजाब-हरियाणा जितना गेहूं पैदा हुआ है. आज दिल्ली में लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के समक्ष भाजपा सांसद की उनके साथ बैठक हुई है, जिसमें यह तय किया गया है कि म.प्र. को 30 अप्रैल तक 3 लाख 19 हजार बारदाने उपलब्ध नहीं कराये गये तथा प्लास्टिक बैग की अनुमति नहीं दी गई तो 30 अप्रैल से वे भाजपा सांसदों के साथ केंद्र सरकार का ध्यानाकर्षित करने के लिये संसद भवन के समक्ष बैठेंगे.

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