• रघुवंश ने स्थापित किया मंदिर

रायसेन, 5 अप्रैल. धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के कई दार्शनिक स्थल जिले में अपने ख्याति को समूचे प्रदेश में बिखेर रहे है.

इसी क्रम में एक दार्शनिक स्थल भोपाल से जबलपुर मार्ग पर बरेली के करीब छींद दरवार राष्ट्रीय राजमार्ग से तीन किमी. दूरी पर स्थित है जो कि समूचे प्रदेश में छींद वाले दद्दा के नाम से जाना जाता है. जिला मुख्यालय से तकरीबन 86 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग बरेली मुख्यालय से 7 किमी दूर छींद दरबार स्थित है. ऐसा कहा जाता है कि छींद गांव रघुवंशी बाहुल्य है. उक्त मंदिर भी भगवान श्री राम के दास कहे जाने वाले पवन पुत्र हनुमान का है, और रघुवंशी भगवान रघु अर्थात श्रीराम चंद्र जी के वंशज कहलाते हैं.

एक किंवदंती के अनुसार छींद के बुजुर्ग ने बताया कि उक्त छींद दरबार आज से सैकड़ों वर्ष पहले से ही यहां मौजूद है, जो कि एक पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी के उपासक द्वारा यहां उपासना करने के उपरान्त प्रत्यक्ष दर्शन देने के बाद से ही यहां पर वे मौजूद हैं. इसी का प्रमाण है कि उस काल से ही यह पेड़ जो कि लगभग 5 सौ वर्ष पुराना है. भक्त और भगवान की बीच की भक्ति का प्रत्यक्षदर्शी है. इस दरबार में जो भी श्रद्धालु श्रद्धाभाव के साथ आते हैं, उनकी झोली कभी खाली नहीं रहती है. साथ ही महा आरती एवं 5 शनिवार व मंगलवार आने की परम्परा यहां पर कायम है, जो भी भक्त अपनी मन्नतों के साथ 5 मंगलवार या शनिवार अंजनी पुत्र के यहां आते हैं, उनकी मुरादें हमेशा से पूरी होती आई हैं.

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