भारत के लिये 19 अप्रैल का दिन शुभकंर बन गया है. आज सुबह (19 अप्रैल) को सुबह 8 बजकर 7 मिनिट पर ओडीसा राज्य के बालासोर जिले के व्हीलर द्वीप से भारत के रक्षा संगठन डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान) ने अंतर महाद्वीपीय बैलास्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इससे भारत के रक्षा इतिहास में एक गौरवशाली युग प्रारंभ हो गया.

कुछ संयोग ही बड़े विचित्र स्वयं ही बन जाते हैं, जो बड़े शुरु होते हैं. इस मिसाइल को कल बुधवार 18 अप्रैल को छोड़ा जाना था, लेकिन वर्षा होने के कारण इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया और 19 अप्रैल का दिन आ गया. इसी दिन 37 साल पहले भारत ने अपने पहले उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ को अंतरिक्ष में छोड़कर अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया था और पुन: इसी दिन अंतर महाद्वीपीय बैलास्टिक मिसाइल युग में प्रवेश किया है. इसके साथ ही भारत संसार के 4 अन्य देशों अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के साथ पांचवां राष्टï्र बन गया है, जिसके पास यह मिसाइल हो गई है. यह 20 मिनिट में 5000 मील दूर तक पूरे एशिया और आधे यूरोप तक जाकर मार कर सकती है. यह कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है. यह एक टन परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली है.

इसमें एक और गौरवशाली बात यह भी है कि इस मिसाइल को बनाने वाली वैज्ञानिकों की टीम की लीडर एक महिला वैज्ञानिक टैसी थामस है, जिन्होंने भारत के मिसाइलमैन पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की टीम में काम किया है. श्री कलाम ही भारत को मिसाइल युग में लाये हैं. इस आई.सी.बी.एम. मिसाइल का नाम ‘अग्नि – 5’ है. इसके अभी 3-4 परीक्षण और होंगे इसके बाद इसे भारत की सेनाओं में शामिल कर लिया जायेगा. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने रक्षा अनुसंधान वैज्ञानिकों को बधाई देते हुये कहा कि यह हमले करने के लिये नहीं, लेकिन लोगों को हम पर हमला करने से रोकने का काम करेगी. आज इसने हिन्द महासागर में एक निश्चित लक्ष्य को अपना निशाना लगाया था. इनके सभी संयंत्र और पेरामीटरों ने बिल्कुल सही काम किया.

भारत की इस उपलब्धि पर चीन की प्रतिक्रिया भी शत्रुतापूर्ण रही. सन्ï 1962 में भारत पर चीन द्वारा अकस्मात हमला कर देने से पहले तक भारत की सेनायें सामान्य स्तर की सेनाएं बनी हुई थीं. देश विभाजन के कारण पाकिस्तान से जन्मजात शत्रुता निर्मित हो ही चुकी थी. चीन के हमले के बाद भारत को यह अहसास हुआ कि इस शत्रु राष्ट्र ने परमाणु बम और अंतर महाद्वीप बैलास्टिक मिसाइल बना ली है. तब भारत को उस प्रतिक्रिया में अपने रक्षा की दृष्टिï से परमाणु बम व अब यह मिसाइल बनानी पड़ी है. लेकिन चीन ने भारत की इस उपलब्धि पर यह कहा है कि भारत ऐसे विकास से तनाव पैदा कर रहा है, जबकि चीन के कारण ही ऐसी सैन्य तैयारी करनी पड़ी है.यह सिद्घांत निर्विवाद है कि शक्ति से ही शांति आती है.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कियानी ने अपनी सरकार में कहा है कि भारत के साथ हमें सैनिक प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिये. वार्ताओं से समाधान ढंढा जाये और सियाचीन जैसे दुर्गम इलाके से दोनों देश अपनी फौजें हटा ले. इस पर बहुत ज्यादा खर्च आ रहा है. इसे विकास में लगाया जाये. पाकिस्तान के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ ने कहा है कि हमें खुद अपनी तरफ से ही पहल कर सियाचीन से सेनायें हटा लेनी चाहिये.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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