धार्मिक शिक्षा अनिवार्य नहीं हो क्रिश्चियन असेंबली

भोपाल, 15 नवंबर. स्कूलों में हिन्दू ग्रंथ भगवत गीता पढ़ाने संबंधी मुख्यमंत्री की घोषणा की मिली जुली प्रतिक्रिया हुई है. भाकपा और सेक्युलर मंच ने विरोध करते हुये इसे संविधान के विपरीत बताया है जबकि क्रिश्चियन समाज का कहना है कि धार्मिक शिक्षा का विषय ऐच्छिक होना चाहिये न की अनिवार्य.

हिन्दू संगठनों की ओर संतों ने स्कूलों में गीता पढ़ाने के मुख्यमंत्री के निर्णय का समर्थन किया है.जबकि भारतीय कम्यनिस्ट पार्टी भाकपा ने स्कूलों में गीता पढ़ाने की घोषणा को असंवैधानिक बताते हुए इस घोषणा को वापस लेने की मांग की है. भाकपा के राज्य सचिव महेन्द्र वाजपेयी और प्रांतीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र कुमार शैल ने कहाकि धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई किसी भी व्यक्ति का निजी मामला है. लेकिन सरकार द्वारा स्कूलों में किसी भी धार्मिक पुस्तक की पढ़ाई की घोषणा भारत के संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है तथा बच्चों की वैज्ञानिक समाज के विकास में भी बाधक है.यह भाजपा सरकार की शिक्षा के भगवाकरण की कूटनीति के तहत फासिस्ट कदम है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सेक्युलर व प्रगतिशील मूल्यों की रक्षा हेतु मुख्यमंत्री की स्कूलो में गीता पढ़ाने संबंधी घोषणा के खिलाफ जनता से लामबंद होने की अपील की है.

राष्ट्रीय सेक्लर मंच ने पवित्र हिन्दू ग्रंथ गीता को स्कूलों में पढ़ाने के निर्णय को संविधान के प्रावधानों और भावना के विपरीत बताते हुए कहा है कि हमारा संविधान सेक्युलर है जिसके अनुसार राजसत्ता किसी भी धर्म को संरक्षण नहीं दे सकती. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है. गीता को अनिवार्य रूप से पढ़ाने का निर्णय लेकर मुख्यमंत्री ने संविधान विरोधी आचरण किया है. विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए कटु शब्दों पर भी आपत्ति की है. मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह कहा है कि स्कूलों में हर हाल में गीता का ज्ञान देंगे यदि उसे किसी को तकलीफ होती है तो होती रहे. यह भाषा अहंकार से परिपूर्ण है.

वक्तव्य पर जनवादी लेखक संघ के रामप्रकाश प्रगतिशील लेखक संघ के पूर्णचन्द्र रथ, सेक्युलर फोमर के संयोजक एल.एस. हरदेनिया ईसाई महासंघ के महासचिव जैरी पाल, सिखों के प्रतिनिधि एवं अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य तेजेन्द्र सिंह सलूजा, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष इब्राहिम कुरैशी, मध्यप्रदेश बौध्द भिक्षु संघ के अध्यक्ष भन्ते सागर शाक्य पुत्र कोआरडीनेशन कमेटी फार इंडियन मुस्लिम के मसूद अहमद खान, हारामोनी फाउंडेशन के जॉन एंथोनी आदि ने हस्ताक्षर किए है. हस्ताक्षर कर्ताओं ने कहा है कि यदि यह निर्णय लादा गया तो इससे स्कूल में पढऩे वाले छात्र-छात्राएं धार्मिक आधार पर विभाजित हो जाएंगे.

धार्मिक शिक्षा का विषय ऐच्छिक हो अनिवार्य नहीं

आल इंडिया क्रिश्चियन एसेम्बली के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू सोलामन ने कहा है कि सारे विश्व में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई पारसी जैन, बौध्द आदि धर्मो के अधिकतर अनुयाई है जिनके बारे में हमें स्कूल में पहले से ही पढ़ाया जाता रहा है. सभी धर्म शास्त्रों का अपना एक महत्व है और हम उनका आदर करते है, परंतु किसी भी धर्म विशेष के धर्म शास्त्र को अनिवार्य रूप से पढ़ाने से बेहतर तरीका यह है कि सभी धर्म ग्रंथों की पढ़ाई अनिवार्य न होकर ऐच्छिक होना चाहिये जैसे किसी भी धर्म का विद्यार्थी अन्य किसी भी धर्म का विषय लेकर ज्ञान प्राप्त कर सकता है.अ.भा. वर्षीय धर्म संघ शाखा म.प्र. जिलाध्यक्ष एवं धर्माधिकारी प. गंगा प्रसाद आचार्य ने गीता को पाठयक्रम में समाविस्ट करने की घोषणा का स्वागत कर गीता के पठन-पाठन से सभी वर्गो के छात्र-छात्राओं को सन्मार्गव सदाचार, सद्चरित्र निर्माण में सहायक सिद्घ होगा गीता से कर्तव्य निष्ठां तथा आत्म निर्भरता धैर्य संयम व बौध्दिक विकास के साथ-साथ मानवीय गुणों का संचार सर्वधर्म समभाव की भावना का सपना साकार होगा सभी धर्म जाति भाषा वालों का आदर्श गीता ग्रंथ सर्वमान्य है धर्म संघ अन्य धर्मो के ग्रंथों का समान रूप से सम्मान पर बाल देता है गीता धर्म विशेष का नहीं वैज्ञानिक रत्न है.

भागवत गीता शास्त्र को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने पर मुख्यमंत्री का स्वागत

म.प्र. संत पुजारी महासंघ के महासचिव पंडित अशोक भारद्वाज ने एवं प्रदेश के सम्पूर्ण पूजारियों ने मुख्यमंत्री द्वारा इंदौर में कि गई घोषणा भागवत गीता को पाठयक्रम में शामिल करने का स्वगत किया है एवं धन्यवाद दिया है एवं पूजारी संघ का इस मुद्ïदे पर सरकार को खुला समर्थन है.

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