सर्न के वैज्ञानिक सौ फिसदी आश्वस्त

ब्रह्मïण्ड की उत्पत्ति के संबंध में महत्वपूर्ण खोज का दावा

जेनेवा, 4 जुलाई. सर्न के वैज्ञानिकों ने विज्ञान की सबसे बड़ी खोज का दावा करते हुए आज कहा, हमें सर्न महाप्रयोग के दौरान नए कण (गॉड पार्टिकल) मिले हैं. वैज्ञानिकों की आज की घोषणा के अनुसार वे लगभग सौ फीसदी आश्वस्त हैं कि उन्हें ईश्वरीय कण मिल गया.

विगत पांच दशक के अध्ययन के बाद सर्न के वैज्ञानिकों ने आज दावा किया कि उन्होंने एक ऐसे सूक्ष्म अणु (सबएटोमिक पार्टिकल) को खोज निकाला है जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह ब्रह्मांड की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण है. विश्व के सबसे बड़े परमाणु शोध केन्द्र के दो स्वतंत्र दलों में से एक के प्रमुख जोइ इनकांडेला ने यूरोपीय परमाणु शोध केन्द्र (सर्न) में वैज्ञानिकों से कहा कि आंकड़े इस खोज के लिए जरूरी निश्चितता के स्तर तक पहुंच गए हैं.

लेकिन उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि नया अणु छोटा हिग्स बोसॉन ही है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि उसने ब्रह्मांड के सभी पदार्थों को आकार और स्वरूप दिया. इस बीच, भौतिक वैज्ञानिकों के दूसरे दल ने भी दावा किया कि उन्हें एक नए पदार्थ के बारे में पता चला है जो संभवत: हिग्स बोसॉन है. इस घोषणा के बाद पीटर हिग्स सहित सभी वैज्ञानिकों ने तालियां बजाकर सराहना की. वर्ष 1964 में पहली बार हिग्स ने ही इस तत्व के अस्तित्व की बात कही थी. सर्न ने बयान में कहा कि उन्हें एलएचसी में जो सूक्ष्म पदार्थ मिला है वह लंबे समय से खोजे जा रहे हिग्स बोसॉन की तरह है लेकिन इस खोज की पहचान के लिए और तथ्यों की जरूरत है. सर्न महानिदेशक रोल्फ हेउअर ने कहा, ‘हमने प्रकृति को लेकर अपनी समझ में नया मुकाम हासिल किया है. रोल्फ ने कहा कि हिंग्स बोसोन की तरह लगने वाले इस अणु की खोज और ज्यादा विस्तृत अध्ययनों का रास्ता खोलती है जिसके लिए और आंकड़ों की जरूरत है. इससे नए अणु की प्रकृति के बारे में पता चलेगा और जो हमारे ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने में मददगार होगा.

हिग्स बोसॉन का सिद्धांत क्या है?

क्वहिग्स बोसॉनक्व या क्वगॉड पार्टिकलक्व या क्वईश्वरीय कणक्व से पता लग सकेगा कि कणों में भार क्यों होता है. ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई होगी. जब कणों में भार आता है तो वो एक दूसरे से मिलते हैं. हालांकि कणों में भार आने और उनके मिलने की बात समझ में आती है, लेकिन अभी तक कोई प्रयोग हिग्स कणों की मौजूदगी का प्रमाण नहीं दे सका है. हिग्स सिद्धांत का प्रतिपादन 1960 के दशक में प्रो. पीटर हिग्स ने किया था.

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