नयी दिल्ली, 21 नवंबर, नससे. शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक पारित होने की संभावना है. ऐसे में टीम अन्ना ने सरकार पर प्रस्तावित लोकपाल के कद को घटाकर शक्तिहीन और टिन का खाली कनस्तर बना देने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकपाल के दायरे से नागरिक संहिता एवं निचली नौकरशाही को बाहर करने से वे आश्चर्यचकित हैं.

टीम अन्ना ने आरोप लगाया कि संसद के प्रस्ताव के उलट यह कदम उठाया गया है. टीम अन्ना के एक बयान में कहा गया है कि सरकार ने सीबीआई, न्यायपालिका, नागरिक संहिता, व्हिसल ब्लोवर की सुरक्षा, ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से हटाने का प्रस्ताव किया है. क्या इससे लोकपाल टिन का ऐसा खाली कनस्तर नहीं बन जाएगा, जिसके पास न तो कोई शक्ति होगी और न ही अधिकार होगा. बयान में कहा गया है कि संसद द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के आधार पर हजारे ने अपना अनशन तोड़ दिया था. इस प्रस्ताव को कुछ लोगों ने सदन की भावना बताया था. लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हजारे को लिखे अपने पत्र में इसका जिक्र एक प्रस्ताव के रूप में किया था.

टीम अन्ना ने कहा कि यह प्रस्ताव स्पष्ट तौर पर कहता है कि लोकपाल विधेयक के जरिए तीन मुद्दों का समाधान किया जाएगा. इन तीन मुद्दों में राज्यों में लोकायुक्त का पद इसी विधेयक से सृजित किया जाए और निचली नौकरशाही एवं नागरिक संहिता को लोकपाल विधेयक में शामिल किया जाना शामिल है. टीम अन्ना के बयान में कहा गया है कि हालांकि, पूर्व के प्रस्ताव के विपरीत उठाए जा रहे इन कदमों से वे आश्चर्यचकित हैं, जिसके तहत सरकार ने नागरिक संहिता और निचली नौकरशाही को लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखने और नागरिकों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए एक कमजोर एवं प्रभावहीन विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है. बयान में कहा गया है कि स्थाई समिति की चर्चा से बाहर आ रही इस तरह की खबरें चिंता का विषय है. टीम अन्ना ने गु्रप सी एवं ग्रुप डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग करते हुए कहा कि निचली नौकरशाही को बाहर रखने के कदम का वे सख्त विरोध करेंगे.

उन्होंने कहा कि क्या इसका मतलब यह नहीं है कि वे भ्रष्टाचार में लिप्त हो सकेंगे और उनकी जांच कोई एजेंसी नहीं कर सकेगी? कहीं हम उन्हें भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का लाइसेंस तो नहीं दे रहे हैं? एक आम आदमी को रोज-रोज गु्रप सी और ग्रुप डी के कर्मचारियों के पास जाना होता है. भ्रष्टाचार विरोधी उनके आंदोलन में लाखों लोगों ने भाग लिया था और रोज-रोज के इस भ्रष्टाचार से छुटकारा पाना चाहा था. सीबीआई को लोकपाल के नियंत्रण से बाहर रखने के मुद्दे पर टीम अन्ना ने कहा कि एजेंसी के बारे में स्थाई समिति का प्रस्ताव लोकपाल का दायरा और प्रभाव घटाकर महज एक डाकघर में तब्दील कर देगा, जो शिकायतें प्राप्त करेगा, उन्हें सीबीआई के पास भेजेगा, सीबीआई की रिपोर्ट प्राप्त करेगा और उन्हें अदालत के समक्ष पेश करेगा. टीम अन्ना ने न्यायाधीशों की आपरधिक जांच की मांग की, जिसे न्यायिक जवाबदेही विधेयक में भी शामिल नहीं किया गया है. बयान में कहा गया है कि इसे अब लोकपाल में शामिल किया जाना चाहिए.

मेरे नाम का राजनीतिक उपयोग न करें: अन्ना

नई दिल्ली,समाजसेवी अन्ना हजारे ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे उनके नाम का इस्तेमाल न करें। अन्ना ने साफ  किया कि यदि राजनीतिक दल उनकी अपील के बावजूद ऐसा करते हैं तो वे उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे। अन्ना ने अपनी टीम के प्रमुख सदस्यों को निशाना बनाने के मामले में यूपीए सरकार पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकपाल आंदोलन से डरते हैंए वे उनके समर्थकों और निकट सहयोगियों पर हमले कर रहे हैं. और उनकी टीम को तोडऩे की कोशिश की जा रही है। रालेगण सिद्धि में अन्ना ने कहाए ऐसे लोगों को डर है कि अगर मजबूत लोकपाल विधेयक लागू हुआ तो उनका राजनीतिक जीवन खतरे में पड़ जाएगा। इससे पहले अन्ना हजारे ने कहा था कि वे कोर कमेटी के पुनर्गठन की योजना बना रहे हैं। कमेटी में मुसलमानो  आदिवासियो, दलितों और युवाओं को शामिल किया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जा सकेगा।

Related Posts: