केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 59वीं बैठक में बोले सिब्बल

नयी दिल्ली, 6 जून. सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढाने के लिए इस वर्ष छह हजार करोड रुपये की लागत से राष्ट्रीय अध्यापक एवं प्रशिक्षण मिशन लांच करेगी और अध्यापन के लिये देश के सर्वश्रेष्ठ एवं प्रतिभाशाली लोगों को शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्त करेगी.

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आज यहां केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 59वीं बैठक का उद्घाटन करते हुये यह जानकारी दी. बैठक में श्री सिब्बल के अलावा कई केन्द्रीय मंत्री, योजना आयोग के सदस्य, शिक्षा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एनसीईआरटी), सीबीएसई के प्रमुख एवं जाने-माने शिक्षाविद् तथा केब के सदस्य भाग ले रहे हैं. केब शिक्षा के क्षेत्र में निर्णय लेने की यह शीर्ष निकाय है. श्री सिब्बल ने  देश में शिक्षकों की कमी तथा शिक्षा के स्तर पर चिन्ता जताते हुये कहा कि आम समाज में अत्यंत योग्य लोगों की कमी है. लेकिन हमें शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रतिभाशाली एवं सर्वश्रेष्ठ लोगों को शिक्षा के पेशे में लाना है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा पेशे को लेकर समाज में जो सकीर्ण मानसिकता काम कर रही है. उसे बदलना है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष 12वीं पंचवर्षीय योजना में हम छह हजार करोड की लागत से राष्ट्रीय अध्यापक एवं प्रशिक्षण मिशन लांच करने जा रहे हैं ताकि शिक्षकों को हर तरह का प्रशिक्षण दिया जा सके. गौरतलब है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस वर्ष 12 मार्च को ससंद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुये राष्ट्रीय शिक्षक मिशन की स्थापना करने की सरकार की योजना का जिक्र किया था. श्री सिब्बल ने 17 अप्रैल को इस संबंध में संबद्ध पक्षों के साथ चर्चा की थी और राज्यों के शिक्षा सचिवों के साथ बैठक में भी इस पर विचार-विमर्श किया था. श्री सिब्बल ने स्कूलों में ड्राप आउट पर चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के क्रियान्वयन में भी हमें दिक्कतें आ रही हैं. हमें दलितों, आदिवासियों तथा अल्पसंख्यकों का भी शिक्षा के क्षेत्र में सशक्तीकरण करना है.

पर यह काम केवल कानून बनाने से नहीं होगा. बल्कि समाज को भी इसमें शामिल करना होगा. उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग का कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न हो. इसके लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम शुरु करने की भी सरकार की योजना है. वित्त मंत्रालय को इस संबंध में अंतिम निर्णय लेना है. गौरतलब है कि इस वर्ष बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस योजना की घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारे सामने कई चुनौतियां हैं और हमें सर्वसम्मति से फैसले करने हैं. देश का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम शिक्षा के क्षेत्र में क्या कुछ कर पाते हैं पर सब कुछ मेरे हाथ में नहीं है. बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए योजना आयोग के सदस्य नरेन्द्र जाधव ने कहा कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा की गुणवत्ता बढाने. शैक्षणिक संस्थाओं की संख्या बढाने एवं पूंजी निवेश पर जोर दिया जाएगा ताकि देश की अर्थव्यवस्था एवं श्रम बाजार की जरुरतों को ध्यान में रखकर शिक्षा का विकास हों. बैठक में शिक्षा का अधिकार सर्वशिक्षा अभियान. मेरा विश्वविद्यालय. सूचना प्रौद्योगिकी. मिशन तथा क्रेडिट गारंटी फंड आदि के मुद्दे पर भी चर्चा होगी.

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