बैंगलोर। बागी तेवर दिखा रहे येदुरप्पा का फिर से कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है। राज्य में सरकार बचाने के लिए बीजेपी आलाकमान उनके सामने झुकने को मजबूर हुआ है। लेकिन ये ताजपोशी अप्रैल में ही हो पाएगी।

इस बीच पार्टी अवैध खनन के मामले में येदुरप्पा की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख जान लेना चाहती है। येदुरप्पा को हाईकोर्ट से इस मामले में मिली राहत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। आखिरकार येदुरप्पा की रिसोर्ट राजनीति रंग लाई। बजट सत्र के दौरान आधे से अधिक बीजेपी विधायकों के साथ बैंगलोर के एक रिसोर्ट में बैठे येदुरप्पा के तेवर बता रहे थे कि कर्नाटक में बीजेपी सरकार कभी भी गिर भी सकती है। घबराए आलाकमान ने उन्हें दिल्ली बुलाया। गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, कर्नाटक के सहप्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और संगठन महासचिव रामलाल के साथ उनकी बैठक हुई। इसमें साफ कर दिया गया कि बजट पास होने के बाद अप्रैल के पहले पखवारे में उनकी ताजपोशी की जाएगी। बैठक के बाद येदुरप्पा किसी विजेता की तरह मीडिया के सामने आए। पार्टी ने येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर ये रुका हुआ फैसला कुछ खास वजहों से लिया है। येदुरप्पा को तुरंत मुख्यमंत्री बनाने से उनका विरोधी खेमा भी सक्रिय हो सकता था.

जबकि बजट पास कराने के लिए पार्टी विधायकों का एकजुट रहना जरूरी है।
इस बीच ये भी तय हो जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट येदुरप्पा को अवैध खनन मामले में दोषमुक्त करने वाले हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करेगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन के मामले में एक उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी बनाई है, जो येदुरप्पा के खिलाफ इस मामले मे सीबीआई जांच कराने की याचिका पर सुनवाई कर रही है। कमेटी ने येदुरप्पा से इस मामले में जवाब मांगा है।

यानी आलाकमान नहीं चाहता कि येदुरप्पा को जल्दबाजी में दोबारा मुख्यमंत्री बनाने से उसकी किरकिरी हो। उधर, मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा भी समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं। उनका साफ कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन पर कोई विचार नहीं हो रहा है। जाहिर है, गुटबाजी सतह पर है। उडुपी-चिकमंगलूर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के लिए भी पार्टी की इसी गुटबाजी को जिम्मेदार बताया जा रहा है। पार्टी खतरे को भांप रही है, इसलिए परिवर्तन की सुगबुगाहटों के बीच अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज येदुरप्पा को दोबारा मुख्यमंत्री के खिलाफ थे। लेकिन नितिन गडकरी ने उनकी रजामंदी ले ली है। फिर भी अभी येदुरप्पा की राह में सुप्रीम कोर्ट और उसकी बनाई कमेटी का फैसला बड़ी बाधा है। उनसे क्लीन चिट नहीं मिली, तो उनकी गोटी आसानी से फिट नहीं होगी।

Related Posts: