• पूरा नही हो सका राहुल का सपना
  • सरकार को लगा बड़ा झटका

नई दिल्ली, 27 दिसंबर. सरकार ने लोकसभा में लोकपाल बिल पास करवा लिया है. लेफ्ट, बीएसपी और एसपी के सांसदों के वॉकआउट के बाद सरकार का लोकपाल बिल पास कराना तय माना जा रहा था. अब बुधवार को राज्यसभा में लोकपाल बिल पेश किया जाएगा. सरकार के लिए राज्य सभा से इस बिल को पास करवा पाना इतना आसान नहीं माना जा रहा है.

लोकसभा में पास करवाने के बावजूद सरकार लोकपाल को संवैधानिक दर्जा नहीं दिला पाई है. संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए कुल सांसदों के कम से कम 50 फीसदी और उपस्थित सांसदों के 2/3 बहुमत की जरूरत थी. संवैधानिक दर्जे पर सरकार 2/3 वोट नहीं जुटा पाई. हालांकि पहले कहा गया कि संवैधानिक दर्जा मिल गया है लेकिन इस तरफ सरकार की हार के बारे में सुषमा स्वराज ने ध्यान दिलाया. बाद में प्रणब मुखर्जी ने इसे लोकतंत्र के लिए दुखद बताते हुए कहा कि उनके पास बहुमत नहीं था. इससे पहले सुषमा स्वराज, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, कपिल सिब्बल आदि प्रमुख नेताओं की गर्मागर्म बहस के बाद शाम को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिल पर बयान दिया. मनमोहन सिंह ने बिल पर विपक्ष की तमाम आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपने वायदे के मुताबिक मजबूत लोकपाल बिल लेकर आई है.

उन्होंने सभी पार्टियों से लोकपाल बिल को पास कराने के लिए सहयोग मांगा. मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार का लोकपाल बिल संसद की भावना के अनुरूप है और कानून बनाने का अधिकार केवल संसद के पास है. बाकी लोग केवल अपनी राय दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि बिल को तैयार करने में हर वर्ग की राय ली गई. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि सीबीआई को लोकपाल के तहत काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती , क्योंकि यह संविधान के दायरे से बाहर होगा. उन्होंने कहा कि देश की हर इकाई को संविधान के तहत ही काम करना होगा और उसे संसद के प्रति अपनी जवाबदेही रखनी होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राज्यों के स्तर पर है और बिना लोकायुक्त के भ्रष्टाचार देश से पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

पक्ष में 321 सांसद
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की बात उठाई थी. संविधान संशोधन पर 394 सांसदों ने वोट दिया. 321 सांसदों ने संशोधन के पक्ष में , जबकि 71 ने विरोध में वोट दिया. दो सांसद 2 गैरहाजिर रहे. दिन भर की बहस के बाद सरकार ने 10 संशोधन प्रस्ताव पास किए जिसमें विपक्ष के सारे प्रस्ताव गिर गए.

सरकार ने किये कुछ बदलाव…
1- कॉर्पोरेट , मीडिया संबंधी लेफ्ट का संशोधन गिरा.
2- पीएम पर केस चलाने के लिए अब लोकपाल बेंच का 2/3 बहुमत काफी होगा. इस पर बीजेपी की मांग मानी गई.
3-लोकपाल के दायरे से सेना बाहर.
4-लोकपाल की नियुक्ति के लिए पैनल में अब राज्यसभा में विपक्ष का नेता शामिल होगा.
5-अल्पसंख्यक आरक्षण पर बीजेपी की मांग ठुकराई. अल्पसंख्यकों को आरक्षण जैसा का तैसा.

जब टीएमके ने खड़े किए सवाल

राज्यों में लोकायुक्त के गठन की अनिवार्यता का औचित्य समझाने सदन में उतरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भाजपा और यहां तक कि यूपीए को बाहर से समर्थन देने वाली पार्टी राजद ने भी चुनावी भाषण देने का आरोप मढ़ दिया. लोकपाल पर बहस की शुरुआत में ही भाजपा ने आपत्तियों की कतार लगाकर विपक्षी खेमे के तेवर साफ कर दिए. यूपीए की अहम घटक दल तृणमूल कांग्रेस की तरफ से बिल पर खड़े किए गए सवालों ने सरकार को मुसीबत में डाल दिया. लोकपाल जैसी संस्था की सभी ने वकालत की लेकिन सरकार के मौजूदा विधेयक को कमजोर बताते हुए इसे अस्वीकार्य बताने में भाजपा, जदयू, अन्नाद्रमुक, बीजद से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक शामिल रहे. भाजपा ने लोकायुक्त के गठन की अनिवार्यता को संघीय ढांचे पर प्रहार बताकर इसे गैर संवैधानिक बिल बता दिया तो वहीं मजहब के आधार पर लोकपाल में आरक्षण देने के प्रावधान पर भी ऐतराज जता दिया. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सीधे सीधे प्रधानमंत्री को इसके दायरे से बाहर रखे जाने की मांग कर दी.

बीजेपी के सभी प्रस्ताव गिरे

बीजेपी द्वारा पेश किए गए सभी तीनों संशोधन प्रस्ताव वोटिंग में गिर गए. कार्पोरेट और मीडिया को लोकपाल के दायरे में लाने का प्रस्ताव गिर गया. सीपीएम और बीजेडी का संशोधन प्रस्ताव भी गिर गया. इससे पहले मंगलवार को लोकपाल पर लोकसभा में करीब 10 घंटे तक महाबहस चली. इससे पहले की घटनाक्रम में दिनभर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार घमासान हुआ. लोकपाल-लोकायुक्त बिल पर लोकसभा में बहस शुरू हुई तो भाजपा समेत तमाम विपक्षी दलों ने तो बिल में खामियां गिनाकर सरकार पर निशाना साधा ही, संप्रग की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने भी विधेयक पर सवाल खड़े कर दिए. लोकपाल के साथ लोकायुक्त के गठन की अनिवार्यता जैसे कई प्रावधानों पर सियासी दलों के ऐतराज को दूर करने में जुटी रही सरकार इस तरह से अलग-थलग पड़ती भी नजर आई.

राज्यसभा में राह नहीं होगी आसान

इससे पहले सरकार के लोकपाल बिल पर विपक्ष की ओर से लाए गए तकरीबन सभी संशोधन प्रस्ताव गिर गए. हालांकि राज्यसभा में लोकपाल बिल की राह आसान नहीं होगी क्योंकि वहां यूपीए बहुमत में नहीं है. लोकसभा में लंबी बहस के बाद सपा और बीएसपी ने मतदान में भाग नहीं लिया और सभी 43 सांसदों ने सदन से वॉक आउट कर दिया. सदन में जैसे ही लोकपाल बिल पास हुआ, उसके बाद बिल के विरोध में लेफ्ट, एआईडीएमके और बीजेडी ने भी सदन से वॉकआउट कर दिया. लोकसभा में सरकार ने लोकपाल बिल में संशोधन के दस प्रस्ताव पेश किए. जिसमें से सात प्रस्ताव पास हो गए. बीजेपी द्वारा पेश किए गए सभी तीनों संशोधन प्रस्ताव वोटिंग में गिर गए. कार्पोरेट और मीडिया को लोकपाल के दायरे में लाने का प्रस्ताव गिर गया.

Related Posts: