• लेवी की अवधि 30 जून तक

भोपाल 10 नवम्बर.नभासं. मध्यप्रदेश सरकार ने 2012 में उपार्जित होने वाले धान की कस्टम मिलिंग और चावल पर लेवी लगाये जाने की नीति घोषित कर दी है. नीति के प्रावधान के मुताबिक लेवी सिर्फ चावल उत्पादकों से वसूली जायेगी और व्यवसायी इससे मुक्त रहेंगे. इसी तरह लेवी की शक्ल में केवल अरवा चावल ही प्राप्त किया जायेगा. लेवी लिये जाने की अवधि 30 जून तक तय की गई है.

इस सिलसिले में सभी संभाग आयुक्तों कलेक्टरों और संबंधित एजेंसियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं. तयशुदा नीति के तहत संबंधित मिलर्स द्वारा एक लॉट कस्टम मिलिंग कर इसे जमा करने के बाद एक लॉट चावल लेवी ली जायेगी.कलेक्टर द्वारा संबंधित मिलर की मिलिंग क्षमता का आंकलन करवाया जायेगा . यह भी साफ किया गया है कि यदि उसना मिलें अरवा चावल का उत्पादन भी करती हैं तो उनसे भी लेवी ली जा सकेगी. इसी तरह लेवी उसी धान से बने चावल की ली जायेगी जो खरीफ विपणन वर्ष 2012 का उत्पादित और इस दौरान केन्द्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य बोनस समेत या उससे अधिक मूल्य पर खरीदा गया हो . इसलिये शेष धान से बने चावल को मिलर्स खुले बाजार में बेचने के लिये स्वतंत्र रहेंगे.

जिला कलेक्टरों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में मिलर्स की मिलिंग क्षमता के आधार पर 35 प्रतिशत अनिवार्य कस्टम मिलिंग के सिलसिले में जारी आदेश अमल के लिये एक नवम्बर 2011से लागू माना जायेगा. नीति के प्रावधान के अनुसार लिंकिंग योजना के तहत उपार्जित धान से बने चावल को लेवी से मुक्त रखा जायेगा. इसी तरह आधा टन तक की क्षमता वाली चावल मिलों और हलर से कूटे जाने वाले धान पर लेवी नहीं लगेगी. इसके अलावा चावल से तैयार पदार्थों में पोहा ्मुरमुरा आदि पर भी लेवी नहीं ली जायेगी.

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