मध्यप्रदेश में अब गेहूं अनाज से ज्यादा बवाल हो गया. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को अब खुद जाकर मंडियों और उपार्जन खरीद केंद्रों पर इंतजाम और काम का निरीक्षण करना पड़ रहा है.

अब समस्या यही हो गई है कि बम्पर फसल से गेहूं उपार्जन केंद्रों पर गेहूं  अटा-टूट… आ रहा है. लेकिन उसे तोलने, भरने, परिवहन करने और गोदामों में रखने की हर स्तर पर व्यवस्था टूट गई. फ्लोर मिलों ने अपराधी व दंबंगों के माध्यम से न सिर्फ 4 पहिये वाले ट्रकों बल्कि 8 पहिये वाले ट्रालों से फर्जी तौर और भारी रिश्वत देकर केंद्रों व मंडियों में लाखों करोड़ों रुपयों का टनों गेहूं चोरी करवा दिया. बीच-बीच में यहां-वहां मानसून पूर्व की बरसात तो जरा सी होती है, लेकिन उसी से हजारों बोरे गेहूं भीग कर सड़ जाता है. बोरों की कमी से केन्द्र व राज्य सरकार में टक्कर चल रही है. जो बोरे आ रहे हैं वे किसानों द्वारा लूटे जा रहे हैं. शासन ने तात्कालिक व्यवस्था के रूप में बिना बोरों के खरीदी शुरु कर दी है और उसे कमरों में भरा जा रहा है.

गेहूं के परिवहन में इतना गंभीर घोटाला हो गया है कि शासन को उसकी जांच के लिये आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को जांच के निर्देश देने पड़े. गेहूं के उत्पादन में तो मध्यप्रदेश अब एक ओर कदम आगे बढ़कर हरियाणा से आगे निकल देश का दूसरा गेहूं उत्पादक राज्य बन गया है. पहला राज्य पंजाब है. वहां भी ऐसी ही भर्राशाही है कि शराब गोदाम में रखी थी और गेहूं बाहर रखा था.

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