पांच साल बाद आया जवाब

भोपाल, 22 अगस्त, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में सुशासन, लोक सेवा गारंटी और नवाचारों के ढि़ंढ़ोरे की असलियत यह है कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय श्रीमती जमुना देवी ने जून 2007 में  विधानसभा में गलत जानकारी देने के संबंध में जो पत्र लिखा था वन विभाग से उसका उत्तर अगस्त माह में प्राप्त हुआ.

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि प्रमुख विपक्षी दल के नेता द्वारा लिखे गए पत्र का जवाब जब पांच साल में मिला है तो आम आदमी की शिकायतों के निराकरण के हालात क्या होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय श्रीमती जमुना देवी ने 6 जून 2007 को विधानसभा में गलत जानकारी देने के संबंध में जो पत्र लिखा था उसका वन विभाग ने जवाब जुलाई में दिया.  सिंह ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में अपनी पीठ थपथपा कर गदगद होकर मुख्यमंत्रीे ने जिस सुशासन और नवाचार का प्रदर्शन किया वह कितना दिखावटी और सजावटी है यह भाजपा आलाकमान को देखना चाहिए. सिंह ने कहा कि भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों को मध्यप्रदेश की योजनाओं को अपनाने को इसलिए कहा जा रहा है कि यहां कि ज्यादातर योजनाओं के जरिए किस तरह जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है वह शिवराज सिंह चौहान बेहतर ढंग से कर रहे है.  सिंह ने कहा कि सुशासन, नवाचार और लोकसेवा गारंटी के नाम पर जो पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रदेश को दिया गया है उस पर भी सवाल खड़ा हो गया है.

क्या है मामला:- तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय श्रीमती जमुना देवी ने 6 जून 2007 को एक पत्र लिखा. इस पत्र में श्री अनिल गर्ग के ज्ञापन में ग्राम धनवाही प.ह.नं. 98 के खसरा क्रमांक 3 का 19.04 एकड़ एवं ग्राम हरैया प.ह.नं. 100 के खसरा क्रमांक 5 एवं 1 का कुल रकबा 19.08 एकड़ राजस्व को अंतरित भूमि वनभूमि माने जाने के संबंध में विधान सभा में दिए गए गलत उत्तरों के परिप्रेक्ष्य में लिखा गया था.

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