लोकसभा में वित्तमंत्री ने पेश किया देश का आर्थिक सर्वे

नई दिल्ली, 15 मार्च, नससे. संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2012 में कहा गया कि बाजार निजी हित से संचालित होता है, लेकिन इसके साथ ही कहा गया कि नैतिकता के अभाव और रिश्वतखोरी के कारण देश गरीबी के दलदल में फंसा रहेगा. केंद्र सरकार ने आज माना कि मौजूदा पंचवर्षीय योजना में कृषि की विकास दर हासिल नहीं हो पाएगी. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज लोकसभा पेश वर्ष 2011-12 के आर्थिक सर्वेक्षण में यह स्वीकार करते हुए कहा कि पंचवर्षीय योजना 2007-12 में कृषि की विकास दर का लक्ष्य चार प्रतिशत निर्धारित किया गया था लेकिन यह हासिल नहीं हो पाएगा.

सर्वेक्षण में कृषि विकास दर का अनुमान 3.28 प्रतिशत लगाया गया है. सर्वेक्षण में कृषि की विकास दर बढाने के लिए इसमें निवेश की वकालत की गयी है. इसके अनुसार कृषि उत्पादों की फ्सल कटाई अवसंचरना में महत्वपूर्ण निवेश अंतरों को ध्यान में रखते हुये संगठित व्यापार और कृषि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. सर्वेक्षण में कहा गया है कि कृषि उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है और देश में खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2010-11 में 24 करोड 47 लाख 80 हजार टन तक पहुंच गया है. हालांकि तकरीबन एक अरब 20 लाख लोगों का पेट भरना एक बड़ी चुनौती है और इसलिए कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. वर्ष 1951-52 में देश में खाद्यान्न उत्पादन महज पांच करोड 20 लाख टन था. सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 1960-61 से लेकर वर्ष 2010-11 तक कृषि की औसत विकास दर दो प्रतिशत रही है.

अगली पंचवर्षीय योजना 2012-17 के दृष्टि पत्र में कृषि पर खास ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया गया है. दृष्टि पत्र में कहा गया है कि अगर कृषि की विकास दर चार प्रतिशत हासिल करनी है तो प्रयासों को दुगुना करना होगा. इसके लिए उच्च प्रौद्योगिकी अपनानी होगी और उत्पादकता बढानी होगी. चालू वित्त वर्ष के दौरान महंगाई दर 6.5 से सात फीसदी के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है.

आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2011- 12 की खास बातें
* सरकार द्वारा मुद्रास्फीति को काबू में लाने के जोरदार उपाय.
* सर्वेक्षण में वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद में 6.9 फीसदी वृद्धि रहने का अनुमान.
* वर्ष 2012-13 में आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने की संभावना.
* चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुद्रास्फीति 6.5 से 7.0 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना.
* आर्थिक सर्वे में वर्ष 2011.12 के दौरान आर्थिक वृद्धि 6.9 प्रतिशत पर बरकरार.
* 2012 में मुद्रास्फीति की दर में कमी आएगी.
* कृषि क्षेत्र में 2.5 फीसदी विकास दर का अनुमान.
* बुनियाद ढांचे के अंतर के समाधान हेतु मल्टीब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सुझाव.
* अप्रैल 2011- जनवरी 2012 के दौरान भारत के संचयी निर्यात में 23.5 फीसदी की वृद्धि.
* सेवा क्षेत्र में 9.4 फीसदी तक की वृद्धि और सकल घरेलू उत्पादन में हिस्सा 59 फीसदी तक बढ़ा.
* आर्थिक वसूली में सुधार जारी रखने के मद्देनजर औद्योगिक वृद्धि दर 4 से 5 फीसदी रहने की उम्मीद.
* थोक मूल्य सूचकांक खाद्य मुद्रास्फीति जनवरी 2012 में गिरकर 1.6 फीसदी रह गई है.

जो फरवरी 2010 में 20.2 फीसदी थी.
-भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढऩे वाली अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है.
-देश की राजकोषीय ऋण रेटिंग 2007-12 में 2.98 फीसदी बढ़ा.
-वित्तीय सुदृढीकरण जारी, बचत और पूंजी निर्माण के बढऩे की आशा है.
-इस वित्त वर्ष के पूर्वार्ध में निर्यात 40.5 फीसदी की दर से और आयात 30.4 फीसदी की दर से बढ़े.
-विदेशी व्यापार निष्पादन विकास का मुख्य संचालक बना रहेगा.
-विदेशी मुद्राभंडार में वृद्धि होगी जो लगभग सचूमा विदेशी ऋण को समाप्त करेगा.
-इस वित्त वर्ष में सामाजिक सेवाओं पर पर केंद्रीय व्यय बढ़कर 18.5 फीसदी हो जाएगा.
-2010-11 में मनरेगा के अधीन 5.49 करोड़ परिवारों को लाया गया.
-सतत विकास और जलवायु परिवर्तन को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी.

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