वाणिज्य सचिवों के बीच उठेगा एमएफएन मुद्दा

  • पाकिस्तानी वाणिज्य सचिव जफर महमूद दिल्ली पहुंचे

नई दिल्ली, 13 नवंबर. भारत-पाक के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की नई कोशिशें चल रही हैं। इन्हें परवान चढ़ाने के लिए पाकिस्तानी वाणिज्य सचिव जफर महमूद दिल्ली पहुंचे। यहां उनकी बैठक वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर के साथ होगी। दोनों के बीच सचिव स्तर की दो दिवसीय वार्ता आधिकारिक तौर पर सोमवार को शुरू होगी।

एमएफएन के मुद्दे पर खास तौर से चर्चा होगी। जफर की यात्रा से पहले पाकिस्तान ने भारत से 12 वस्तुओं के आयात से पाबंदी हटा ली है। इनमें खास तौर से कच्चा माल और मशीनरी शामिल हैं। पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने आर्थिक और राजनैतिक संबंधों में सुधार की दिशा में विशेष रूप से कदम उठाने शुरू किए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से बातचीत के दौरान सबसे तरजीही देश [एमएफएन] के दर्जे को लेकर पाक के रुख को जानने-समझने का प्रयास किया जाएगा। पाकिस्तान की कैबिनेट बीते दो नवंबर को भारत को व्यापार में एमएफएन का दर्जा देने का प्रस्ताव मंजूर किया। इस दर्जे के बाद वहां आयात के मामले में भारीय वस्तुओं के साथ सरकारी तौर पर भेदभाव नहीं किया सकता। कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के बयानों के चलते को लेकर स्थिति काफी अस्पष्ट हो गई थी। यह अलग बात है कि पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और दूसरे वरिष्ठ मंत्रियों ने यह साफ करने की कोशिश की कि इस्लामाबाद एमएफएन के मुद्दे से पीछे नहीं हट रहा है। एक दिन पहले ही में अड्डू [मालदीव] में 17वें दक्षेस सम्मेलन से इतर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने मनमोहन सिंह से मिले थे। इस बैठक के दौरान गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री से वर्ष 2016 तक सभी वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की प्रतिबद्धता जताई थी। साथ ही विशेष व्यापार रियायत समझौता करने की बात कही थी। यहां आए जफर ने कहा कि पाकिस्तान सबसे तरजीही देश का दर्जा देने से पीछे नहीं हट रहा है। खुद गिलानी भारत को यह दर्जा देने के जबरदस्त समर्थक हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच 2.6 अरब डॉलर का व्यापार होता है। इससे कहीं यादा दोनों के बीच तीसरे देश के जरिए व्यापार होता है। तीसरे देश के माध्यम से व्यापार का आंकड़ा 10 अरब डॉलर के आसपास है।

नहीं करता गिलानी पर भरोसा : मनमोहन

शांति प्रक्रिया में पाक सेना की सहमति की बात पर विश्वास करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अपने पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी पर आंखें बंद करके विश्वास नहीं कर रहे हैं। वे स्पष्ट रूप से समझ गए हैं कि मुंबई जैसा दूसरा हमला बहुत बड़ा झटका होगा। दक्षेस सम्मेलन के दौरान बृहस्पतिवार को सिंह ने गिलानी से मालदीव में भेंट कर द्विपक्षीय संबंध में नया अध्याय लिखने का निर्णय लिया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत विश्वास करो लेकिन परखो पहल अपनाएगा। उन्होंने माना कि संबंध घटनाओं से प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान की असैन्य सरकार के हाथ मजबूत करना चाहता है और गिलानी के रूप में उन्हें एक ऐसा व्यक्ति नजर आया है जो हमारे साथ काम करने को इछुक हैं। गिलानी इस दृष्टिकोण से सहमत हैं कि आतंकवाद साझा दुश्मन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष के लिए भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है कि यदि भारतीय जनता मुंबई के बर्बर कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर संतुष्ट नहीं होती तो तब तक शाति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती है। सिंह ने कहा कि मैं इस मामले में विस्तार से नहीं जाना चाहूंगा।

लेकिन जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ पाक सैन्यबलों बलों की सहमति पर बातचीत की तब मैंने लंबे समय के बाद महसूस किया कि पाकिस्तान के सशस्त्र बल भी इस प्रक्रिया में साथ हैं। शीघ्र ही वार्ता के बहाल होने के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा, इससे ऐसी वार्ता में लाभ मिलेगा जहा नई सूचनाएं उपलब्ध होंगी। उस वार्ता का क्या नतीजा होगा, उसको लेकर मैं आशावादी हूं। उन्होंने ने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंध घटनाओं से प्रभावित होते हैं, अतएव हम दोनों ने यह स्वीकार किया कि यदि मुंबई हमले जैसी कोई और घटना हुई तो यह बहुत बड़ा झटका होगा। इस बात को प्रधानमंत्री गिलानी भी भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा केवल तभी होगी जब पाकिस्तान अपने यहा मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कदम उठाएगा।

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