दक्षिण पश्चिम मॉनसून में देरी के चलते देश के प्रमुख उत्पादक इलाकों में किसान इस खरीफ सीजन में कम अवधि में परिपक्व होने वाले बीज को प्राथमिकता दे रहे हैं। कम अवधि में पकने वाली फसल मसलन बाजरे, दलहन और सब्जियों के बीज की मांग बढ़ रही है, वहीं लंबी अवधि में पकने वाली फसल मसलन कपास, मूंगफली और धान आदि के बीज की मांग में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट की संभावना नजर आ रही है।

अहमदाबाद.   खरीफ सीजन में आम तौर पर बुआई का रकबा 10.57 करोड़ हेक्टेयर होता है, लेकिन इस साल अब तक 14.8 फीसदी रकबे में ही बुआई पूरी हो पाई है जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16.2 फीसदी था।

नैशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष  उदय सिंह ने कहा – बुआई के लिहाज से अगले 10 दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि कई जगहों पर किसानों ने पहले ही कपास की बजाय दलहन या बाजरे को प्राथमिकता दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश जैसे उत्पादक इलाकों में काफी कम बारिश हुई है, लिहाजा खरीफ सीजन में बीजों की मांग पर असर पड़ा है। ज्यादातर बीज कंपनियां इस साल खरीफ सीजन को कमजोर मान रहे हैं। उद्योग के जानकार के मुताबिक, मॉनसून में देरी के चलते खरीफ सीजन में बीजों की मांग में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ सकती है। सरकारी कंपनी नैशनल सीड्स कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा – ‘बारिश में देरी के चलते कई राज्यों ने आपात योजना तैयार कर ली है। कई राज्यों में किसान कम अवधि में पकने वाली फसल को तवज्जो देंगे। इन फसलों में कम संसाधन व कम पानी की दरकार होती है और ये जल्दी परिपक्व हो जाती हैं। ऐसे में हमें इन बीजों की मांग में तेजी दिखाई दे रही है।’ उन्होंंने कहा – हमारे पास 60,000 क्विंटल बीज उपलब्ध है, वहीं सब्जियों के 1,000 क्विंटल बीज हैं। निजी क्षेत्र में हमारे कई साझेदार हैं और वे बीजों की अतिरिक्त जरूरतें पूरी कर सकते हैं। ऐसे में उपलब्धता की समस्या नहीं होगी।

मॉनसैंटो इंडिया लिमिटेड के मुताबिक, कंपनी को बीजों की मांग पर प्रतिकूल असर नजर नहीं आ रहा है और ज्यादा संभावना है कि किसान कम अवधि में पकने वाली बीजों को प्राथमिकता देंगे या फिर हाइब्रिड बीज अपनाएंगे। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा – जिंस की कीमतों, प्रतिफल और सुविधा आदि के हिसाब से किसान फसल की बुआई का फैसला लेते हैं। ऐसे में इस खरीफ सीजन में हमें उम्मीद है कि किसान मक्के, सोयाबीन, अरंडी और मूंगफली के रकबे में इजाफा करेंगे जबकि कपास, मिर्च और धान के रकबे में पिछले साल के मुकाबले कमी लाएंगे।
आणंद कृषि विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक ने कहा – सिंचित इलाकों में थोड़ी बहुत बुआई हुई है। लेकिन ज्यादातर इलाकों में फसलें मोटे तौर पर दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर आश्रित है। इसमें देरी होने पर वे दूसरी फसलों का रुख कर सकते हैं। एन. सीड्स के एक अधिकारी ने कहा कि इस साल कपास के बीज की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

चावल भाव-चावल बासमती (921)- 7000-7500, तिबार 5000-5500, दुबार 4000-4500, मोगरा 2200-3700, बासमती सेला 4500-5000, राजभोग 3500, कालीमूंछ डिनर किंग 4000, दुबराज 3200-3500, परमल 1900-2000, हंसा सैला 2000-2100, हंसा सफेद 1800-1900,  पोहा 2600-2800 रुपए.डेयरी  भाव-शुद्ध घी 300, मक्खन 260, क्रीम 220, पनीर 220, चक्का 120, दही 48, श्रीखंड 170 रुपए.मावा- इन्दौर मावा 220 रुपए, उज्जैन 120 रुपए  प्रतिकिलो.

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