अब मूल्य वृद्धि एक आड़ बनी गयी है. किसी भी वस्तु के दाम बढ़ा दो वजह ''पेटेन्ट और परमानेंट” हो गई कि भाव बढ़ गये है. ऐसा क्या हो गया कि भाव बढ़ गये- अब यह वजह न कोई बताता है और न कोई जान पाया है. मानसून में कुछ उलट-पुलट रही है और सब्जियों के भाव दुगने हो गये. इससे पूर्व के वर्षों में भी बाजारों में खाद्यान्न, दालें, तेल, शक्कर सब कुछ भरा पड़ा था.

वस्तुओं का कोई अभाव भी नहीं था लेकिन भाव लगातार इतने बढ़ गये जितने पहले कभी नहीं थे. प्रधानमंत्री ने कह दिया कि लोगों की आमदनी बढ़ी है. इससे महंगाई बढ़ गयी. वस्तु निर्माता कहने लगे लागत बढ़ गई है. एक हल्ला मच गया है कि भाव बढ़ गये है और भाव बढ़ते जा रहे हैं. सट्टïा बाजार पूरे शबाब पर है और वास्तव में इन हाल के वर्षों में मूल्य वृद्धि नहीं हुई बल्कि मुनाफाखोरी में वृद्धि हुई है. अब तो प्रमाणित हो गया कि सीमेंट कंपनियों ने आपस में गोलबंदी करके एक साथ सभी ने सीमेंट की एक बोरी का दाम 160 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया. जांच में काम्पीटीशन  आयोग को पता चला कि इस तरह बेहताशा… भाव बढ़ाने की कोई वजह नहीं थी. केवल भारी मुनाफाखोरी के लिये इन कंपनियों ने अकारण भाव बढ़ा दिये थे. इन पर 60 अरब रुपयों का जुर्माना लगाया गया.

सरकार भी इस मुनाफाखोरी में पीछे नहीं है. रासायनिक खादों में 300 प्रतिशत की वृद्धि कर दी. खाद की बोरी जो 555 रुपये में बिक रही थी वह अब मूल्य वृद्धि करके 1272 रुपए कर दी गई है. एक हफ्ते में ही आलू, टमाटर, प्याज के भाव 50 प्रतिशत… बढ़ गये. मानसून का अभी तुरन्त कोई भी व्यापाक प्रभाव नहीं पडऩा चाहिए. लेकिन इसके हल्ले में सभी चीजों के भाव बढ़ रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री को खाद्यान्नों में म

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