मुम्बई . देश के शेयर बाजारों में शुक्रवार को तेजी का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 183.24 अंकों की तेजी के साथ 18,762.74 पर और निफ्टी 53.80 अंकों की तेजी के साथ 5,703.30 पर बंद हुआ।

बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 125.48 अंकों की तेजी के साथ 18,704.98 पर खुला और 183.24 अंकों या 0.99 फीसदी तेजी के साथ 18,762.74 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 18,869.94 के ऊपरी और 18,698.51 के निचले स्तर को छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 35.30 अंकों की तेजी के साथ 5,684.80 पर खुला और 53.80 अंकों या 0.95 फीसदी तेजी के साथ 5,703.30 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,735.15 के ऊपरी और 5,683.45 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी देखी गई। मिडकैप सूचकांक 74.52 अंकों की तेजी के साथ 6,607.29 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 59.43 अंकों की तेजी के साथ 7,017.89 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 12 सेक्टरों में तेजी देखी गई। एक मात्र सेक्टर रियल्टी में 0.37 फीसदी गिरावट रही।

‘आर्थिक सुधार से अमेरिकी कारोबारियों में उत्साह’

इस साल की शुरुआत में अमेरिकी कॉरपोरेट जगत धारणा बनाने लगा था कि नीतिगत जड़ता की वजह से भारत में कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन सरकार द्वारा हालिया सुधार से जुड़े उठाए गए कदमों से इसमें बदलाव आया है और यहां के निवेशकों में फिर से उत्साह का संचार हो रहा है। उद्योग संगठन फिक्की के अध्यक्ष आर.वी. कनोडिय़ा ने यहां कहा, कुल मिलाकर बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की अनुमति दिए जाने का यहां स्वागत किया जा रहा है।

भारत में सुधार से जुड़े उठाए गए कदमों के बाद अमेरिकी कारोबारियों की धारणा ‘अब बदल गई है। न्यूयार्क, शिकागो और वाशिंगटन की यात्रा पर आए कनोडिय़ा ने कहा, यहां फिर से विश्वास बहाल हुआ है कि भारत कारोबार के लिए है और सरकार भी इसके पक्ष में है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि भारत के संबंध में धारणा सकारात्मक बनी रहे। उन्होंने कहा कि नए सुधारों और उदारीकरण से भारत में एफडीआई प्रवाह बढ़ेगा विशेषकर अमेरिका से। वाशिंगटन में ऊर्जा पर चल रही बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं, खासकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में। हालांकि उन्होंने सावधान करते हुए कहा कि इस समय हमें संतुष्ट होकर बैठना नहीं चाहिए। कनोडिय़ा ने कहा, हमें सुधार से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहना चाहिए और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए और धन की व्यवस्था, जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) को प्राथमिकता के स्तर पर शुरू करने और श्रम कानूनों में ढील देने जैसे लंबित मुद्दों पर काम करना चाहिए.

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