कहा  फास्ट ट्रैक कोर्ट में क्यों न चले केस

नई दिल्ली, 4 नवंबर। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस भेजकर पूछा है कि सांसदों के आपराधिक मामले फास्?ट ट्रैक कोर्ट में क्?यों न चलाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से चार हफ्तों में जवाब मांगा है।

याचिका में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 162 सांसदों के खिलाफ मामलों में तेजी लाने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति पी. सथशिवम के अध्यक्षता वाली सुप्रीम की पीठ ने यह नोटिस पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त जे.ए. लिंगदोह की याचिका पर जारी की। लिंगदोह ने सभी मामलों को त्वरित अदालतों में स्थानांतरित करने की मांग की है। नोटिस जारी करते हुए न्यायालय ने कहा कि जब सभी राज्यों में त्वरित अदालतें हैं, तो इन मामलों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है।

देश के भीतर पिछले कई सालों से सांसदों पर आपरा?धिक मामले चलते रहे हैं।
हाल ही में बसपा पर चलने वाले आपराधिक मुकदमे इस बात का ताजा उदाहरण है।
इससे पहले भी कांग्रेस, सपा, भाजपा, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के सांसदों पर आपराधिक मुकदमे चलते रहे हैं। भारतीय लोकतंत्र में कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें कत्ल और डकैती के आरोपों से घिरे लोग सांसद का चुनाव लड़ते रहे हैं। लेकिन इन पर पाबंदी की कोई व्यवस्था नहीं है।

लिंगदोह ने रखे सांसदों के आपराधिक साक्ष्य
लिंगदोह ने कोर्ट में उन सभी साक्ष्यों को रखा है जिसमें सांसदों पर लूट, कत्लोगारत और जुर्म के संगीन आरोप लगे हैं। ये सांसद अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आरोप लगाने वालों और गवाहों को प्रभावित करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इन्हीं मामले में आज सख्त नजर आया और उसने सरकार से जवाब तलब किया।

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