मध्यप्रदेश में ठंड का तीसरा दौर आ गया है. राज्य में मावठे की बरसात के हालात बन गये है. कुछ ही दिनों में यहां वर्षा होगी. जो यदि सीमा में हुई तो फसलों को फायदा होगा. इसके साथ कहीं कहीं ओले भी गिरते है उससे उसी अनुपात में नुकसान भी हो जाता है. दूसरे दौर की ठंड से उत्तरी जिलों भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी में ओले गिर चुके हैं. वहां फसलों पर भी पाले से 20 प्रतिशत तक का प्रभाव पड़ा था.

मौसम विभाग यह बता ही चुका है कि उत्तर भारत की भारी हिमपात के प्रभाव से इस साल मार्च तक ठंड पड़ेगी. यानि गर्मी में भी ठंड पड़ेगी. दुनिया भर में मौसम के स्वरूपों में इतना परिवर्तन आता जा रहा है कि उसे समझने और उससे अभ्यस्त होने से लोगों को और देश की खेती को कई बरस लग जाएंगे. अभी तक तो यही कहा जाता रहा है कि दुनिया में गैसों के ग्रीन हाउस प्रभाव से गर्मी बढ़ रही है. अब बरसात भी बढ़ रही है और ठंड भी मार्च की गर्मी को ठंडा करने आ रही है. राज्य में मौसम में अचानक फिर परिवर्तन आ गया है. तेज हवाओं से ठंड फिर बढ़ गई है. बैतूल जिले में मावठे की वर्षा के साथ-साथ ओले भी गिरे. राज्य के 9 संभागों में रीवा, जबलपुर, सागर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शहडोल, होशंगाबाद, ग्वालियर में मावठे की वर्षा तथा ओले गिरने के आसार नजर आ रहे हैं. जबलपुर, होशंगाबाद व सिवनी में पानी गिरा भी है. रीवा और दतिया में सबसे कम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है. जब तक बादल छाये रहेंगे वर्षा तो होगी. लेकिन उसकी वजह से ठंड में कमी आयेगी. लेकिन मावठे के बादल छटने के साथ ही ठंड में एकदम से बढ़ोत्री होगी. मावठे की वर्षा 4-6 दिन की होती है. लेकिन खेती को सिंचाई व जमीन में नमी को बहुत बड़ा सहारा भी दे जाती है. किसान इन दिनों ओले और पाला की आशंकाओं से बड़ा चिंतत रहता है. सरकारी आंकलन व मुआवजा वितरण में काफी देर हो जाती है. पिछली साल का पाला मुआवजा भी अभी तक राज्य के कई किसानों को नहीं मिला है. केंद्र सरकार से जितनी क्षतिपूर्ति का आंकलन कर चुकी है वह रुपया भी अभी सरकार को नहीं मिला है.

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