भोपाल 19 जून. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मानक अग्रवाल ने कहा है कि अब आदिवासियों के जीवनयापन का एक मात्र आधार खेती ही रह गया है. उनके इस आधार को भी छीनने की साजिश इन दिनों जिलों में चल रही है.

कई जिला कलेक्टरों द्वारा आदिवासियों की पुश्तैनी और पट्टे की जमीनें बेचने की अवैध रूप से अनुमतियां दी जा रही हैं, जबकि म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 165 में हुए संशोधन के तहत आदिवासियों की भूमि को गैर आदिवासियों को हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगा हुआ है. आपने कहा है कि टीकमगढ़ जिले के एक पूर्व कलेक्टर ने 70 आदिवासियों की पट्टे की जमीनें झांसी के दो गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी है. ऐसी ही अवैध अनुमतियां कलेक्टरों द्वारा मुरैना और श्योपुर में भी दी गई हैं.

अग्रवाल ने कहा है कि टीकमगढ़ जिले में जिन आदिवासी परिवारों की जमीनें छिन गई हैं, उन परिवारों के मुखियाओं पर दबाव डालकर उनको जमीन बिक्री के लिए मजबूर किया गया था. पुलिस थाने में भी इस बारे में शिकायतें की गई हैं, किंतु जमीनें खरीदने वाले काफी रसूखदार लोग होने और अनुमतियों की कार्यवाही में लाखों रूपयों का अवैध लेन-देन होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और संबंधित आदिवासियों के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है. कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष ने भू-राजस्व संहिता के प्रावधान का उल्लंघन कर आदिवासियों की जमीनों की बिक्री के लिए दी गई सारी अनुमतियां निरस्त कर संबंधित आदिवासियों की उनकी जमीनें वापस लौटाने तथा अवैध अनुमति देने वाले कलेक्टरों के विरूद्व कार्यवाही की मांग की है.

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