श्रीलंका के राष्ट्रपति एवं भूटान के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में बौद्ध वि.वि. का शिलान्यास

भोपाल, 21 सितम्बर (नभास). श्रीलंका के राष्टपति महिंद्रा राजपक्षे ने कहा कि आज पूरे विश्व में शांति सद्भावना और करुणा का संदेश प्रसारित करना हम सभी का कर्तव्य है. उन्होंने विश्वास प्रगट किया कि सांची बौद्ध विश्वविद्यालय अध्ययन अनुसंधान के जरिये ज्ञान का प्रसार करेगा.

श्री राजपक्षे आज सांची में बौद्ध और भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के भूमि पूजन के पश्चात् समारोह को संबोधित कर रहे थे. समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे वाय. थिनले, राज्यपाल रामनरेश यादव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा आदि ने संबोधित किया.
श्री राजपक्षे ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शाीय मूल्यों वाले भारतीय विश्वविद्यालय जैसे तक्षशिला, नालंदा वल्लभी तथा विक्रम शिला में अपनाये गये उच्च शिक्षा के अनूठे पथ का अनुसरण करेगा. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय अपने समृद्ध तथा विविध आयामों से अध्ययन, अनुसंधान के जरिये ज्ञान का प्रसार करेगा.

श्री राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका की जनता और सरकार इस विश्वविद्यालय की सफलता के लिए अपना योगदान देगी. इस अवसर पर भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे वाय. थिनले ने कहा कि भारत और भूटान के बीच युगों पुराने सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. उन्होंने आशा प्रगट की कि सांची विश्वविद्यालय से विभिन्न भाषाओं, धर्मों और सांस्कृति के सांगोपांग अध्ययन में मदद मिलेगी. उनका कहना था कि मनुष्य का भावनात्मक और मानसिक विकास भी होना चाहिए.

थिनले ने कहा कि यह विश्वविद्यालय निश्चित ही उच्च विचारों को बढ़ावा देने वाला साबित होगा. राज्यपाल एवं सांची विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय अनूठा होगा. इससे ज्ञान के साथ-साथ शांति और सद्भाव की भावना का प्रसार करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि सांची भगवान बुद्घ के प्रति आस्था का प्रतीक है. राज्यपाल ने कहा कि सांची बौद्घ एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय उच्च जीवन मूल्यों और विवेक के विकास में सहायक होगा. विश्व स्तर पर यह विश्वविद्यालय शिक्षा और धर्म का मानदंड होगा.

श्रीलंका में सीता मंदिर बने– शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रीलंका के राष्टï्रपति से अपेक्षा की कि श्रीलंका में जिस स्थान पर सीताजी ने अग्नि परीक्षा दी थी, वहां एक भव्य सीता मंदिर बनना चाहिये इसमें मध्य प्रदेश सरकार हर संभव मदद करेगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में बौद्घ गया भी शामिल किया जायेगा. चौहान ने कहा कि श्रीलंका और भारत के युवाओं की एक-दूसरे देशों में सद्ïभाव यात्रा आयोजित की जाये.

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के केंद्र विभिन्न देशों में खोले जाने के प्रयास किये जायेंगे. सांची बौद्घ और भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय नई पीढिय़ों के लिये अद्ïभुत अकादमिक तीर्थ बनेगा. संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सांची विश्वविद्यालय भारत की बहुरंगी और बहुविश्वासी ज्ञान परम्पराओं में शिक्षा के नये स्वरूप को विकसित करेगा.

शर्मा ने कहा कि इस बात पर ध्यान दिया जायेगा कि विश्व के आचार्य कुल से जुड़े विद्वान इस विश्वविद्यालय को निरंतर विकासमान बनाये रखने में अपना योगदान दें. समारोह में महाबोधि सोसाइटी के अध्यक्ष वेन बानगल उपतिस्स नायक, थेरो स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी परमात्मानंद और श्रीप्रकाश अम्बेडकर ने भी विचार प्रकट किये. समारोह के प्रारंभ और अंत में श्रीलंका, भूटान और भारत की राष्ट धुन बजाई गई. विभिन्न आदिवासी नर्तकों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किये गए. कार्यक्रम में थाईलैंड, वियतनाम, कम्बोडिया, चीन, जापान, ताईवान, मंगोलिया और सिंगापुर समेत अनेक देशों के बौद्ध विद्वान एवं बौद्ध संत मौजूद थे.

अपने किस्म  का पहला बौद्ध विवि

सांची में तीन सौ करोड रूपयों की लागत से यह विश्वविद्यालय लगभग एक सौ एक क्षेत्र में बनाया जाएगा1 जल्दी ही इसके कुलपति की नियुक्ति होगी ् ताकि आगे का काम तेज गति से किया जा सके. राज्य सरकार का संस्कृति विभाग इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए काम कर रहा है1 इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान को प्रोत्साहित और संरक्षण करना है.

मानव संग्रहालय देख अभिभूत हुए  थिनले

भोपाल प्रवास पर आये भूटान के प्रधानमंत्री श्री जिग्में वाय थिनले यहां इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के कल अवलोकन के दौरान वहाँ प्रर्दर्शित भारतीय संस्कृति कला और जन. जातियों की प्रर्दशिनयों से काफी अभिभूत हुए.

श्री थिनले ने कहा कि वह  संग्रहालय में विविधतापूर्ण भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को जिस उम्दा तरीके से संजोया गया है उसे देखकर बहुत प्रभावित हुए हैं1 यह संग्रहालय भारतीयों को सदैव याद दिलाता रहेगा कि वे वैश्वीकरण और आधुनिकता की तेज आँधी में भी अपने रीति.रिवाज परम्परा और संस्कृति को बचाकर रखें हैं1श्री थिनले ने वीथि संकुल में एक के बाद एक भारतीय जनजातियों की जीवन..शैली और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनियाँ अत्यन्त रूचि एवं उत्साह से देखी और कहते ही चले गए…वन्डरफुल… वन्डरफुल… वन्डरफुल… श्री थिनले ने भ्रमण के दौरान मानव के प्रागैतिहासिक काल से अब तक के क्रमबद्ध विकास हथियारों जीवन शैली का विकास भारत के भिन्न..भिन्न क्षेत्रों के आदिवासियों की अलग..अलग अनूठी शैली में बने आवासों वाद्य यंत्रों को बहुत ही गौर से देखा1 उन्होंने संग्रहालय में लक्षद्वीप कृष्णा..कावेरी द्वीप. उत्तराखण्ड. झारखण्ड .उडीशा.मधुबनी शैली आदि संस्कृतियों को बहुत ध्यान से देखा1

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