मुंबई.पिछले दो दिनों में स्थानीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में सुधार हुआ है और कीमतें 3-4 फीसदी बढ़ी हैं। दोनों कीमती धातुओं ने मई के पहले पखवाड़े में हुए नुकसान की भरपाई महज दो दिनों में कर ली।

मुंबई के हाजिर बाजार में सोने की कीमतें शुक्रवार को 2.4 फीसदी यानी 670 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़कर 28,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं चांदी में 2.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और इस तरह से चांदी 1385 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 54,085 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। क्या सोना सुरक्षित निवेश का दर्जा दोबारा हासिल कर रहा है या फिर यह गिरते बाजार में कीमतों में सुधार का ही मसला है? विश्लेषक हालांकि सशंकित नजर आए कि सोना सुरक्षित निवेश का दर्जा हासिल कर रहा है क्योंकि उनमें से ज्यादातर से बातचीत में पता चला कि सोने में तकनीकी सुधार हुआ है।

कारोबारियों और विश्लेषकों ने कहा कि सोने में गिरावट आ रही थी क्योंकि निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर डॉलर का दामन थाम रहे थे क्योंकि डॉलर में काफी तेजी आई है, लेकिन निचले स्तर पर सोने में निवेशकों का थोड़ा रुझान देखने को मिला है। खरीदार सोने की तरफ लौट आए हैं क्योंकि यूरो जोन के कुछ बैंक को एसऐंडपी व फिच ने डाउनग्रेड कर दिया है। यूरो जोन ने पहले ही संभावित तौर पर यूनान के बाहर होने और स्पेन में संकट बढऩे से मिलने वाले लाभ को भुनाना शुरू कर दिया है। हालांकि शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स में थोड़ी गिरावट आई है यह 81.34 पर आ गई, जो 0.05 फीसदी नीचे है। शुक्रवार के सत्र में यूरो चार महीने के निचले स्तर से ऊपर आया और यह गुरुवार के 1.2698 के मुकाबले 1.2711 पर आ गया। इस वजह से भी सोने में उछाल आई। बार्कलेज कमोडिटी के विश्लेषक एस कूपर ने कहा कि शॉर्ट कवरिंग की वजह से सोने में उछाल आई है।

इसी तरह का माहौल भारतीय बाजार में भी देखा गया। केडिया कमोडिटीज के अजय केडिया ने कहा – तकनीकी पुल बैक के चलते सोने में सुधार आया है। इसके परिणामस्वरूप पिछले दो दिनों में बढ़े खरीदारी रुझान से सोना वैश्विक बाजार में 50 डॉलर प्रति आउंस बढ़ा है और भारतीय बाजार में सोने में 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम का सुधार हुआ है। एक ओर जहां वैश्विक बाजार में सोना 3.2 फीसदी चढ़कर कॉमेक्स पर 1589.2 डॉलर प्रति आउंस पर पहुंच गया। वहीं कॉमेक्स पर चांदी पिछले दो दिनों में 4.2 फीसदी चढ़कर 28.43 डॉलर प्रति आउंस पर आ गई। दोनों ही धातुओं में मई के पहले पखवाड़े के दौरान क्रमश: 7.5 व 12.3 फीसदी की गिरावट आई थी। दोनों ही कीमती धातुओं में भारी बिकवाली हुई थी क्योंकि निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर डॉलर का दामन थाम रहे थे।

रेटिंग एजेंसियों की तरफ से डाउनग्रेडिंग के अलावा अमेरिका के  विनिर्माण के आंकड़े भी नकारात्मक थे, मसलन अमेरिका में बेरोजगारी की संख्या भी बढ़ी। इस वजह से भी निवेशक सोने की तरफ बढ़े। यूनान में संकट जारी है क्योंकि माना जाता है कि आम लोग उस पार्टी का चुनेंगे जो खर्च पर लगाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के खिलाफ है। कोटक कमोडिटीज के एक विश्लेषक ने कहा – सोने में तेजी आई क्योंकि एफओएमसी ने उम्मीद बंधाई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अतिरिक्त कदमों की घोषणा कर सकता है, अगर आर्थिक परिदृश्य में और गिरावट आती है। दूसरी ओर चांदी शुद्ध रूप से कीमती धातुओं में बढ़ोतरी के चलते आगे बढ़ी। चांदी आम तौर पर सोने का पीछा करती है या फिर आम धातुओं के रुख के हिसाब से चलती है, लेकिन आम धातुओं का कारोबार कमजोर रहा, वहीं चांदी पिछले दो कारोबारी सत्रों में 4 फीसदी बढ़ी है।

विश्लेषक हालांकि यह नहीं कर रहे हैं कि सुरक्षित निवेश के ठिकाने के तौर पर सोने ने अपना दर्जा हासिल कर लिया है। कार्वी कॉमट्रेड के प्रमुख (जिंस व मुद्रा) अरविंद प्रसाद ने कहा – सोने का परिदृश्य फिलहाल अनिश्चित है और ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सोना अपने रुख पर वापस लौट आया है। भारतीय बाजार में सोने में बढ़ोतरी वैश्विक बाजार के रुख के मुताबिक हुई। वैश्विक बाजार में जहां सोने में तेज गिरावट आई थी, वहीं भारतीय बाजार में सोने में उतनी तेज गिरावट नहीं देखने को मिली क्योंकि रुपया निचले स्तर पर आ गया।

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