छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा क्षेत्र में 7 अक्टूबर की सुबह व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 16 पर सुरक्षा सीमा बल (एस.एस.बी.) के गश्ती वाहन पर नक्सलियों ने सुरंगी विस्फोट कर उड़ा दिया. दो जवान मारे गए और दो घायल. अन्य कई लोग भी मृत व घायल बताये जा रहे हैं. इससे पूर्व दंतेवाड़ा में ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) के गश्ती वाहन पर नक्सलियों ने एक बहुत ही जबरदस्त हमला किया था जिसमें 75 जवान मारे गए थे. उस वक्त छत्तीसगढ़ राज्य शासन से लेकर केंद्र सरकार व देश भर में बड़ी गहरी प्रतिक्रिया हुई थी. अभी इस घटना को भी काफी गंभीर व खतरनाक माना जा रहा है कि यह वारदात सुबह के वक्त बहुत ज्यादा चलने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर की गई है. तमाम आते-जाते वाहनों में से एस.एस.बी. के मिनी ट्रक को ही लक्ष्य कर निशाना बना दिया गया.

इससे पूर्व भी पिछले 48 घंटों में नक्सली छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, बीजापुर व नारायणपुर सहित अन्य 3 स्थानों में हिंसक वारदातें चुनौतीपूर्ण ढंग से कर चुके हैं. राजनांदगांव में एक ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष को उनके घर में घुस कर उस समय गोली मार दी गई जब वे टेलीविजन देख रहे थे. नारायणपुर व बीजापुर में भी लोगों को मार दिया गया. हर वारदात के बाद सरकार जो कहती है वह अब एक नारा हो गया कि ”हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है. दंतेवाड़ा में तो पहले सी.आर.पी.एफ. पर हमले के समय से ये हाई अलर्ट चल रहा है उसके बाद भी राजमार्ग पर बंजारी घाट पर हमला हो गया. जब हाई अलर्ट की स्थिति में भी नक्सली दिन दहाड़े हमला करते जा रहे तब राज्य में सुरक्षा की कोई गारंटी या व्यवस्था ही नहीं है. कुछ समय पूर्व निकटवर्ती राज्य ओड़ीसा में एक जिला कलेक्टर और कई वर्ष पूर्व आंध्रप्रदेश में भी एक कलेक्टर का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया था. कभी नक्सली हमलों की गहरी पकड़ में पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र, झारखंड रहे हैं और अब भी वहां सक्रिय हैं, लेकिन गहन हमले सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ व महाराष्ट राज्य के गढ़ चिरोली में हो रहे हैं.

हाई अलर्ट भी चलते जा रहे हैं और केंद्र सरकार की ओर से अभी यह अपील की जा रही है कि नक्सली हिंसा छोड़कर बातचीत के लिए आगे आएं. नक्सली बात करना नहीं चाहते और सरकार उनसे बात करने को उतारू लग रही है. आम आदमी भी अब सरकार के ”हाई अलर्ट नारों से बोर हो गया है. अब यह घोषणा रस्म अदायगी लगती है. अगर कहीं सरकार झुकती नजर आती है तो देश की राजनीति और व्यवस्था पर उसका बड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. सबसे बड़ा प्रश्न यह बना हुआ है कि नक्सलियों के पास ये अति आधुनिक हथियार कहां से और कैसे पहुंच रहे हैं. अभी तक वह जरिये पकड़ में नहीं आ पाए हैं

हाल ही में एक बड़े कारपोरेट प्रतिष्ठान इस्सार पर नक्सलियों को धन पहुंचाने का इल्जाम लगा है. सच यह है कि उस संस्थान का वहां लोह अयस्क खनन का कारोबार है और वे नक्सलियों को बिना फिरौती दिये वहां धंधा नहीं कर सकते. उन्हें मार दिया जाएगा. यह अपने आप में बड़ी ही दुखद स्थिति है कि सरकार वहां लोगों को काम देती है पर संरक्षण नहीं दे पा रही है. हालत इतनी नाजुक हो चुकी है कि वहां सरकारी सुरक्षा बल ही सुरक्षित नहीं है. सरकार ने इस्सार के उच्च अधिकारी को इन नक्सलियों को धन देने के मामले में गिरफ्तार कर लिया. यदि वहां तक धन नहीं पहुंचा तो इस्सार व अन्य ऐसे लोगों को वहां से अपना कारोबार ही समेटना पड़ेगा. जिस तरह श्रीलंका में राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने सैनिक कार्यवाही कर 25 साल युद्ध करते आ रहे लिट्टे का सफाया कर दिया उसी तरह नक्सल विरोधी अभियान भी चलना चाहिए.

 

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