केंद्र सरकार नहीं बना पाई आम सहमति

नई दिल्ली, 7 जून, नससे.पेंशन फंड को लेकर हुई कैबिनेट की बैठक में इसमें होने वाले बदलाव पर फिलहाल फैसला टाल दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि संप्रग के सहयोगी दलों में मतभेदों के कारण कैबिनेट ने महत्वपूर्ण पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण विधेयक 2011 में बदलाव पर फैसला टाला है.

सूत्रों ने बताया कि संप्रग के सहयोगियों में तृणमूल कांग्रेस पेंशन और बीमा सुधारों का मुखर विरोध कर रही है. बैठक में तृणमूल का प्रतिनिधित्व करने वाले रेल मंत्री मुकुल रॉय इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोले. सरकार कैबिनेट बैठक  के दौरान विधेयक में बदलावों को मंजूरी देने के प्रयास में जुटी थी ताकि अगले महीने से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान इसे पारित कराया जा सके. सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट को पेंशन फंड ग्राहकों को सुनिश्चित आय देने संबंधी प्रस्ताव पर विचार करना था. सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा में 24 मार्च2011 को पेश किया था.

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको के विकास के लिए 632 करोड़ रूपए की मंजूरी
कैबिनेट की बैठक में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विकास के लिए 632 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी प्रदान की गई. गौरतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में घिरी हुई है. आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री की बेचैनी साफ देखी जा सकती है. इसी के तहत बुधवार को ढ़ंाचागत सुधारों में तेजी लाने के लिए ऊर्जा, कोयला, विमानन, परिवहन और जहाजरानी विभाग के मंत्रियों के साथ भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बैठक की थी. जिसमें कई योजनाओं को शुरू करने पर सरकार ने सहमति प्रकट की. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री खुद यह तथ्य स्वीकार कर रहे हैं कि महंगाई चरम पर है और रुपये की हालत कमजोर है. विकास दर औंधे मुंह जा गिरी है तथा विदेशी निवेश ठंडा पड़ा हुआ है.
ऐसे में श्री सिंह खुद आगे आकर देश की अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों में जुट गए हैं.

ममता ने लगाया अड़ंगा!

सूत्रों ने बताया कि फैसला टालने का निर्णय बैठक से पहले ही कर लिया गया था. तृणमूल कांग्रेस इस विधेयक को जन-विरोधी मानती है और मंत्रिमंडल में उसके प्रतिनिधि रेल मंत्री मुकुल राय ने पहले बैठक में भाग नहीं लेने का फैसला भी कर लिया था. लेकिन विधेयक पर निर्णय टालने का संकेत मिलने के बाद वह बैठक में पहुंचे. सूत्रों के अनुसार बैठक में विधेयक पर चर्चा जरूर हुई,  लेकिन इस दौरान श्री राय ने चुप्पी साधना ही उचित समझा. एक सरकारी आदेश के जरिये 2003 से काम कर रहा पीएफआरडीए वैधानिक अधिकार हासिल करने के लिए पिछले करीब एक दशक से इस विधेयक के पारित होने का इंतजार कर रहा है. ज्ञातव्य है कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा मौजूदा 26 प्रतिशत से बढाने तथा 49 प्रतिशत करने पर सहमति नहीं बन पाने के कारण केन्द्रीय मंत्रिमंडल को गत 10 मई की बैठक में प्रस्तावित बीमा विकास एवं नियमन विधेयक पर भी फैसला टालना पडा था.

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