• बैंकों और कृषि विभाग की अनदेखी का शिकार किसान आज भी

सीहोर. 21 नवम्बर नससे. खेती को लाभकारी बनाने के लिए एक तरफ केन्द्र और राज्य सरकार कितनी भी योजनाएं चलाए, लेकिन बैंकों और कृषि विभाग की अनदेखी का शिकार किसान आज भी है.

पूरे जिले में लगभग दो लाख 28 हजार एक सौ चौरासी से अधिक भूमि-धारक किसान है. इसमें से एक लाख 65 हजार सात सौ 31 किसानों ने जैसे-तैसे व इधर-उधर से कड़ी मशक्कत करने के बाद 31 अक्टूबर तक अपना किसान क्रेडिट कार्ड बनवा लिया है. वही साठ हजार  से अधिक किसान अपना किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए हर रोज बैंकों में पेशी करने को विवश है. प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाजनी (साहूकारी) के कर्जे से मुक्ति दिलाने के लिए प्रदेश के सभी बैंकों को किसानों को सरलता से केसीसी कार्ड बनाने के निर्देश दे रखे है. वही उनके गृह जिले में सरकारी कवायदों के चलते बैंकों से जिले के केसीसी विहीन किसानों को केसीसी जारी करवाना मशक्कत भरा काम साबित हो रहा है. किसान क्रेडिट बनवाने के लिए किसानों को इन दिनों बैंकों के चक्कर लगाते देखा जा सकता है. सरकार और बैंक किसानों की मदद के लिए कितने ही वादे और दावे करे. लेकिन वास्तविकता किसान को बैंकों में जाकर पता चलती है कि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने में कितने पापड़ बेलने पड़ते है, तब जाकर वह मंजिल तक पहुंचता है. गौरतलब बात यह है कि किसानों को केसीसी जारी करवाने के लिए बैंकों में बकायदा दलालों की सक्रियता जारी है. जिसके चलते आर्थिक बोझ से उतरने का सपना रखने वाले किसानों को पहले खासा अर्थ खर्च करना पड़ रहा है. कतिपय बैंकों में सक्रिय दलाल किसानों से मन चाही रकम ऐंठने के बाद ही उनका केसीसी जारी करवा रहे है.

साठ हजार किसान परेशान- जिले में साठ हजार से अधिक किसान अपने के्रडिट कार्ड बनवाने के लिए परेशान है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केबिनेट मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह क्षेत्र में खेती को लाभकारी और मददकारी बनाने वाली किसान के्रडिट कार्ड योजना इनके गृह जिले में फ्लाप शो में तब्दील हो गई है। यहां के नेता तमाम मंचों से किसानों के कल्याण के लिए कितने ही भाषण दे। लेकिन वास्तविक रूप से हकीकत कुछ ओर ही कहती है। वर्तमान में साठ हजार से अधिक किसान भूमि धारक किसान क्रेडिट कार्ड के लिए बैंकों की ठोकर खाने को मजबूर है।

केसीसी का उद्देश्य- प्रदेश सरकार ने किसानों को साहूकारी कर्ज से मुक्ति दिलाने और आवश्यकताओं के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान के्रडिट कार्ड बनाए जाने की बात कही थी। किसानों को सस्ती दर पर निर्धारित एरिया का किसान अपनी निर्धारित बैंक से अपनी उपज को बढ़ाने और अपनी जरूरतों की पूर्तियों के लिए किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से ऋण दिया जाता है। जिससे किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ऋण प्राप्त कर सकता है।

दलालों के चक्कर में आता किसान- इस संबंध में जब नव भारत की टीम ने किसानों से इस संबंध में चर्चा की तो किसानों का कहना है कि इन दिनों बैंकों और तहसील के आस-पास जमा दलालों के मकड़ाजाल में किसान उलझ जाता है। जिले में किसान क्रेडिट के नाम पर कमीशनखोरी जारी है। जिसके कारण दलाल और अधिकारी चांदी काट रहे है। वही किसानों के लिए ही बनी सरकारी योजनाएं खोखली साबित हो रही है। कई किसान बैंकों के चक्कर लगाने के स्थान पर इन दलालों के मकडज़ाल में उलझकर कमीशन देने पर मजबूर हो जाते है। कई किसानों ने अपना उल्लू सीधा करने के उद्देश्य से पटवारी, दलालों और बैंकों के अधिकारियों से मिली भगत कर अपना उद्देश्य पूरा कर लिया है। जिसके कारण वास्तविक किसान इसका लाभ नही ले पा रहे है।

क्या कहना है किसानों का- ग्राम बामूलिया के वरिष्ठ कृषक कैलाश विश्वकर्मा ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए में कई दिनों से बैंकों की पेशी करने को विवश हूं। बैंक का कहना है, हमारा लक्ष्य पूरा हो चुका है। जिसके कारण मेरा क्रेडिट कार्ड नहीं बना है।  आजकल बैंक वाले नोड्यूज करवाने की कहते है। इसके बाद इन बैंकों में नोड्यूज के चक्कर लगाने पड़ते है। इसी तरह अनेक किसान हर रोज केसीसी के लिए पेशी करते है।

क्या कहना है इनका – अग्रणी जिला प्रबंधक के जिलाधिकारी नरेन्द्र कुमार खरे ने जानकारी देते हुए बताया कि मेरे पास अभी उन किसानों की सूची नही है, जिनके केसीसी कार्ड बनाए जाने है. बैंकों को राजस्व विभाग, कृषि विभाग और प्रशासन  सूची नही देता है जिसके कारण हम किसानों की मद्द करने में असमर्थ हो जाते है. हम तो चहाते है किसानों को आसानी से किसान के्रडिट कार्ड प्राप्त हो लेकिन विभागीय खींचतान के कारण हजारों किसान वंचित हो रहे है.

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