भोपाल, 30 अक्टूबर. तुलसी मानस प्रतिष्ठïन मध्यप्रदेश मानस भवन में सप्त दिवसीय  पं. रामकिंकर प्रसंग के तृतीय दिवस पर डॉ. रामाधार शर्मा ने कहा कि ब्रम्हृ सूत्र के अनुसार आनंद भयो अभ्यास ब्रम्हृ आनंद का भंडार है.

प्रत्येक प्राणी जन्म से मरण तक आनंद की कामना करता है. और इसका प्रयास भी करता है. सुख आनंए की अभिलाषा सदैव करता है यह पुराना अभ्यास है नया अभ्यास नहीं. आनंद की प्राप्ति का भाव कैसा है यह प्राणी के मनोभाव एवं हृदय के आनंद भाव पर है.

कथा का विस्तार करते हुए डॉ. रामाधार शर्मा ने कहा किे दूसरों को प्रसन्न देखकर सज्जनों को बड़ी प्रसन्नता होती है. यह आनंद का सच्चा स्वारूप है. किन्तु दुर्जनों के मन में ऐसा नहीं होता उन्हें ईष्र्या द्वेष, होता है.  कार्यक्रम के पूर्व में पं. रामकिंकर एवं तुलसीदास जी के चित्र पर रामलीला समिति के संयोजक शंकर लाल शाबू ने दीप प्रज्वलित किया. एवं महाराज श्री का स्वागत किया.

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