भोपाल, 18 अक्टूबर. भागवत कथा में भगवान के 24 अवतार हम सबके भीतर भी है. बस जरूरत है हमें अवतार बनने की. इसके लिये भागवत कथा का लोभ रहित वक्ता से मोह रहित होकर श्रवण कीजिये.

यह सद्विचार राष्ट्र संत माँ कनकेश्वरी देवी ने रविंद्र भवन के मुक्ताकाश मंचपर चौथे दिवस व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि भागवत कथा भगवान के अवतारों की कथा है. अवतार कथा केवल गाने सुनने के लिये नहीं बल्कि अवतार बनने के लिये होती है. इस संसार में अहेतुक बिना उद्देश्य के कोई नहीं आया. राम हो या कृष्ण सबके अवतार है. इसी तरह प्रत्येक जीवात्मा अवतार ही है. भगवान के अवतारों को उनके आने का उद्देश्य पता होता है, लेकिन हमें हमारे जीवन का हेतु पता नहीं है. यदि तुम्हे तुम्हारे आने का हेतु समझ में आ गया तो जो काम तुम करोगे वह कर्म नहीं लीला बन जायेगी. कोई भी क्रिया जन्म बंधन का कारण नहीं बनेगी. लीला में आनंद है बंधन नहीं. इसलिये अवतार करें वो लीला लेकिन हम करें वो कर्म है. लेकिन हम भी तो अवतार ही है. जिस तरह बीज में वृक्ष बनने की क्षमता की तरह जीवात्म का में परमात्मा बनने की क्षमता होती है. लोभ रहित वक्ता मोहरहित श्रोता से अवतार की संभावना है. यदि आपके अंदर हरि नाम गुनगुनाने का भाव बना तो समझ लो आपके अंदर नारद प्रकट हुआ है. न्यायप्रिय हुये तो समझ लो परसुराम प्रकट हुये है. परसुराम के पिता जमदग्रि की हत्या सहस्त्रार्जुन में कर दी. इस ब्रम्ह हत्या के लिये क्षत्रियों ने हत्यारों की दंडित नहीं किया. तो परसुराम ने इनको भी दोषी माना.

भागवत कथा के आरंभ में संसदी कार्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा, कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया, कृषि राज्यमंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा, माधव सिंह दांगी, कैलाश नारायण सारंग, विश्वास सारंग, भोपाल चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल, आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, जस्टिस आर.डी. शुक्ला, व्ही.आर. खरे, पदमवरैया, मधु गार्गव, बसंत गुप्ता ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की.इस अवसर पर समाजसेवी राधेश्याम अग्रवाल एवं माधुरी मिश्रा को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर समिति के रवि गगरानी, बंटी सांई, अशोक जैन भाभा, अजय श्रीवास्तव, सतीश नायक, वीरेंद्र पाठक, विनोद अग्रवाल आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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