नई दिल्ली, 15 फरवरी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि इस साल देश में खाद्यान्न उत्पादन 25 करोड़ टन की रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच सकता है.

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा वर्षा आधारित खेती पर आज यहां आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि उपज बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं और इस साल खाद्यान्न उत्पादन का रिकार्ड बनेगा. प्रधानमंत्री सिंह ने कहा, ‘हमारे किसानों ने हमें इस साल फिर गौरान्वित किया. पर अभी हमें लंबा रास्ता तैयार करना है. हम इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरत सकते, क्योंकि बागवानी और पशु उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे हमें खाद्यान्न उत्पादन के कुछ क्षेत्रों को इन कार्यों के लिए स्थानांतरित करना होगा. प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि ऐसे में खाद्यान्नों की उत्पादकता में उल्लेखनीय इजाफा करना होगा. राष्ट्रपति भवन में आयोजित आज की बैठक में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अलावा 20 राज्यपालों, आठ केंद्रीय मंत्रियों, पांच मुख्यमंत्रियों और कृषि विश्वविद्यालयों के 37 कुलपतियों ने भाग लिया. राष्ट्रपति द्वारा गठित राज्यपालों की समिति की इस बारे में दो बैठकें पहले ही हो चुकी हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादन लक्ष्य से 50 लाख टन अधिक रहेगा. ताजा अनुमानों के अनुसार, कपास उत्पादन भी 3.4 करोड़ गांठ रहेगा, जो एक नया रिकार्ड होगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने  कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन की सालाना वृद्धि दर मात्र एक प्रतिशत है, जबकि 2020-21 तक देश की अनुमानित आवश्यकता पूरा करने के लिए यह दर दो प्रतिशत होनी चाहिए.प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि कृषि मूल्य और सब्सिडी की मौजूदा नीति और व्यवस्था से जमीन की उर्वरा शक्ति का क्षरण हो रहा है. उन्होंने कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव पर चिंता जताते हुए कहा खेतों से खुदरा उपभोक्ताओं तक कृषि उत्पादों के दामों में भारी अंतर हो जाता है. कटाई के बाद दाम कम होते हैं. हमें इस सभी समस्याओं को कृषि विपणन व्यवस्था को सुधारकर दूर करना होगा और साथ ही आपूर्ति श्रृंखला में निवेश करना होगा. प्रधानमंत्री ने खास कर शीघ नष्ट होने वाले कृषि उत्पादों के विपणन, परिवहन और भंडारण सुविधाओं में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कृषि अनुसंधान और प्रसास सेवाओं के क्षेत्र में भी निजी निवेश की जरूरत पर बल दिया.

सिंह ने कहा कि वर्षा सिंचित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है. इन क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता काफी कम है। वर्षा सिंचित क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये क्षेत्र आज भी प्रकृति पर टिके हैं और हमारे प्रयासों के बावजूद इन क्षेत्रों की स्थिति नहीं सुधरी है. देश के कुल फसली क्षेत्र में वर्षा सिंचित खेती का हिस्सा 60 प्रतिशत का है. देश के 80 प्रतिशत से अधिक तिलहन और दलहन उत्पादन में इस क्षेत्र का ही योगदान रहता है. प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र  किया कि खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि क्षेत्र की मजबूती जरूरी है. ‘वास्तविक समावेशी विकास किसानों को उनके जीवनयापन की सुरक्षा मुहैया कराए बिना नहीं की जा सकता.’ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा गठित तीन प्रमुख समूहों की सिफारिशों का जिक्र  करते हुए सिंह ने कहा, ‘इन समूहों ने अपनी रिपोर्ट दे दी हैं और खाद्य एवं कृषि मंत्रालय ने उनकी समीक्षा की है. मुझे बताया गया है कि इनमें से ज्यादातर सिफारिशें स्वीकार किए जाने योग्य हैं. उन पर कार्रवाई शुरू हो गई है या होने जा रही है.’ कृषि और संबंधित क्षेत्र की वृद्धि दर 11वीं योजना (2007-12) में अनुमानत: 3.5 प्रतिशत रही है, जो इससे पिछली पंचवर्षीय योजना में 2.4 फीसद रही थी. 2010-11 के फसल वर्ष (जुलाई से जून) में खाद्यान्न उत्पादन 24.47 करोड़ टन रहा था.

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