भोपाल,21 फरवरी,नभासं. होलिका दहन और धुलेंडी का पर्व इस बार एक ही तारीख में मनेगा. ज्योतिषविदों की माने तो ऐसा तिथियों के उलटवार के कारण हो रहा है. 7 मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि में भद्रा लगने के कारण होलिका दहन अर्धरात्रि बाद सुबह 4 बजकर 33 मिनट पर होगा. यानि 8 मार्च को तड़के होलिका दहन होगा. आठ मार्च को ही धुलेंडी रहेगी. आठ साल पहले 2003 में होलिका दहन व धुलंडी पर्व एक ही दिन मनाया गया था. इसके बाद अगले साल 2013, वर्ष 2016 व 2022 में भी इस तरह का संयोग बनेगा.

”होलिका दहन” के विषय में शास्त्रों में कहा गया है कि यह कार्य केवल रात्रि में ही किया जाता है, क्योंकि असुरराज हिरण्यकश्यप की बहन होलिका एक निशाचरी थी जिसे वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि भी नहीं जला सकती है. लेकिन भगवत् भक्त प्रहलाद की भक्ति के प्रताप से होलिका जलकर भस्म हो गई एवं प्रहलाद सुरक्षित बच गये तभी होलिका का दहन जो कि एक निशाचरी अर्थात रात्रि में विचरण करने वाली होती है, उसका दहन भी रात्रिकाल में ही शुभ माना जाता है लेकिन सूर्य की पुत्री एवं शनिदेव की बहिन ”भद्रा” के समय में होलिका दहन से विनाश की स्थिति उत्पन्न होती है!7 मार्च 2012 को भद्रा 11 घन्टा 20 मिनिट तक रहेगी! नारद पुराण के अनुसार दिन में एवं प्रतिपदा में व भद्रा में होलिका दहन वर्जित बताया गया है. योतिषाचार्य पंडित धर्मेन्द्र शास्त्री के अनुसार भद्रा में होलिका दहन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भद्रा में होली जलाने से राष्ट्र, नगर, महानगर एवं ग्राम की विशेष हानि होती है एवं बुधवार की भद्रा को भद्रिका कहा जाता है जो कि अधिक उग्र स्वभाव की होती है इसलिये धर्म सिन्धु ग्रन्थ के अनुसार ”भद्रा मुखं वर्जयित्वा” अर्थात् भद्रा मुख की रात्रि 10:4 से 11:50 तक रहेगी. उस समय को त्याग करके भद्रा का पुज्छ समय मध्यरात्रि 11:50 से 1:02 बजे तक होलिका दहन करें या भद्रा समाप्ति पश्चात प्रात: 4:18 से सूर्योदय के पहले तक होलिका दहन शुभ रहेगा. होली का क्या होगा प्रभाव- अग्नि तत्व की सिंह राशि में होलिका दहन के कारण इस वर्ष भयंकर गर्मी रहेगी एवं देश में आगजनी, बम कांड, विस्फोटक पदार्थ की तस्करी, आग्नेय क्षेत्र में विशेष प्राकृतिक प्रकोप के साथ वालामुखी भी आ सकते हैं. नवग्रहों के राजा की राशि सिंह होती है व इसमें होलिका दहन होने से साधीशों एवं राजनेताओं को पीड़ा व किसी वरिष्ठ राजनेता का निधन हो सकता है.

8 दिन तक सभी शुभ कार्य बन्द रहेंगे
होलिका दहन के 8 दिन पूर्व से होलाष्टक अर्थात होली का सूतक काल माना जाता है इसमें विवाह आदी समस्त शुभ एवं मांगलिक कार्य वर्जित बताये गये हैं. शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में कोई नए एवं शुभ कार्य की शुरूवात नहीं करें.

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