वाशिगटन, 13 सितम्बर,पाकिस्तान के तीन नागरिकों ने पाकिस्तानी तालिबान को साजो सामान मुहैया कराने के षडयंत्र में अपना दोष स्वीकार कर लिया है. इन लोगों पर एक आतंकी संगठन के एक कार्यकर्ता को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका लाने में मदद करने का आरोप था.

अदालत में कल हुई सुनवाई के दौरान इरफान उल हक (37), कासिम अली (32) और जाहिद यूसुफ (43) ने एक विदेशी आतंकी संगठन को साजो सामान मुहैया कराने के षड्यंत्र के आरोप में अपना दोष स्वीकार कर लिया.
इन तीनों को सजा नौ दिसंबर को सुनाई जाएगी. प्रत्येक दोषी को अधिकतम 15 साल कैद और 250,000 डालर के जुर्माने की सजा हो सकती है. दोष स्वीकार करने के लिए हुए समझौते के तहत तीनों आरोपियों ने अपनी सजा पूरी होने के बाद पाकिस्तान जाने के आदेश पर सहमति जताई.

सहायक अटार्नी जनरल लैनी ए ब्रुएर ने कहा कि तीनों आरोपियों ने उस व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका लाने की कोशिश की जिसे वह एक आतंकी संगठन का सदस्य मानते थे. उन्होंने कहा कि आर्थिक लाभ के लिए ये लोग अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालना चाहते थे. गैरकानूनी तरीके से लोगों को लाने से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है और हम ऐसे खतरों से निपटने के लिए देश में और विदेश में अपने विधि प्रवर्तन सहयोगियों के साथ लगातार काम करते रहेंगे.

इरफान, अली और यूसुफ को कोलंबिया में दर्ज एक शिकायत के आधार पर 13 मार्च को मियामी में गिरफ्तार किया गया था. इस शिकायत में इन लोगों पर एक विदेशी को गैरकानूनी तरीके से देश में लाने का षड्यंत्र रचने का आरोप था.
आरोपियों द्वारा आतंकवाद के षड्यंत्र के आरोप में अपना दोष स्वीकार करने के बाद सरकार इन लोगों के खिलाफ विदेशी को गैरकानूनी तरीके से लाने का षड्यंत्र रचने के आरोप में सुनवाई रद्द कर देगी.

विधि विभाग का कहना है कि इरफान, अली और यूसुफ ने माना है कि तीन जनवरी से दस मार्च के बीच, उन्होंने तहरीक ए तालिबान को झूठे दस्तावेजों के आधार पर साजो सामान मुहैया कराया था जबकि वह जानते थे कि यह संगठन आतंकवाद और आतंकी गतिविधियों में लिप्त है.

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने गैरकानूनी तरीके से उस विदेशी को पाकिस्तान से अमेरिका लाने का अभियान चलाया जिसे वह तहरीक ए तालिबान का सदस्य मानते थे. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने तहरीक ए तालिबान को एक सितंबर 2010 को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था.

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