• भ्रटाचार के बहाने कांग्रेस के विरोध से सकते में हैं लोग

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर. गांधीवादी नेता अन्ना हजारे की हुंकार से राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा हो गई है. कोई इसे अन्ना के स्वभाव का हिस्सा मान रहा है तो कोई इसे उनके आंदोलन को पर्दे के पीछे से सहयोग करने वाले दल विशेष को फायदा पहुंचाने का हथकंडा मान रहा है, लेकिन इससे इतर ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषक अन्ना की घोषणा से न सिर्फ हैरान हैं, बल्कि इसे उनके रणनीतिकारों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का परिणाम मान रहे हैं.

प्रेक्षक मान रहे हैं कि अन्ना को एक मुद्दे विशेष पर आक्रोशित जनसैलाब का समर्थन हासिल हुआ था, लेकिन जिस तरह से अब वे राजनीतिक घोषणा करने को आतुर दिख रहे हैं, उससे उनकी मुहिम का भविष्य संदेह के घेरे में है, क्योंकि अन्ना को जो समर्थन मिला था, उस पर दलों की मोहर नहीं थी, लेकिन इस बार अन्ना ने भ्रष्टïाचार के बहाने कांगे्रस का राजनीतिक विरोध करके अपने राजनीतिक एजेंडे को सतह पर ला दिया है. इतना ही नहीं, उत्तरप्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से चौकन्ने राज्य में दस्तक देने से पहले अन्ना के रणनीतिकारों ने उन्हें हरियाणा के हिसार जैसे एकतरफा लड़ाई के बहाने और आगे बढ़ाने का प्रयास किया है, क्योंकि इस चुनाव में कांगे्रस को बेहतर परिणाम की उम्मीद नहीं है. कारण यह है कि यह सीट भजनलाल की मृत्यु के कारण खाली हुई है और पिछले चुनाव में कांगे्रस यहां तीसरे नंबर पर रही थी. इसी वजह से अन्ना के रणनीतिकारों ने मौके की नजाकत भांपते हुए हिसार में कांगे्रस विरोध का हथकंडा अपनाया है.

प्रेक्षक मान रहे हैं कि यदि कांगे्रस की हार होती है तो बिना समय जाया किए अन्ना के रणनीतिकार इसे अन्ना इफेक्ट का प्रचार करेंगे, लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है, क्योंकि हिसार में इस वक्त भजनलाल के पुत्र अजय विश्रोई के पक्ष में सहानुभूति की लहर है, इसलिए यदि परिणाम भाजपा समर्थित विश्नोई के पक्ष में आता है तो इसे किसी भी हाल में अन्ना इफेक्ट नहीं कहा जा सकता. लेकिन अन्ना के रणनीतिकार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण समाज में निर्विवादित बन चुके अन्ना को भी राजनीतिक चासनी में सराबोर करने में जुट गए हैं. प्रेक्षक मान रहे हैं कि अन्ना के रणनीतिकारों द्वारा वक्त का चुनाव भले ही सही किया गया हो, लेकिन मुद्दे का चुनाव भटकाने वाला है, क्योंकि किसी दल विशेष के विरोध का हथकंडा समाजसेवी अन्ना की छवि के लिए सही नहीं माना जाएगा.

गर्दन पर पिस्तौल न रखें : बंसल
नई दिल्ली. जन लोकपाल मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने कहा कि आप किसी की गर्दन पर पिस्तौल रखकर कोई चीज नहीं हासिल कर सकते हैं।  संसद की स्थाई समिति इस पर विचार कर रही है और इसपर सदस्यों का विचार भी प्राप्त कर रही है।  उनकी यह टिप्पणी हजारे की चेतावनी के एक दिन बाद आई है.  जिसके तहत कहा गया था कि यदि जन लोकपाल विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पारित नहीं किया जाता है तो वह आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान पांच राज्यों में लोगों से कांग्रेस के पक्ष में वोट नहीं डालने को कहेंगे।

फूट डालने करोड़ों खर्च हो रहे : अन्ना
कुछ लोग किसी भी तरह मेरी टीम में मतभेद पैदा करना चाहते हैं। इस काम के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बुधवार को रालेगण सिद्धि में पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना ने कहा – लेकिन ऐसा नहीं है। हमारी टीम में किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं है। हम मिलकर एक ही मुद्दे पर काम कर रहे हैं जो देश से भ्रष्टाचार को मिटाना है।  अन्ना हजारे ने इससे पहले कहा था कि उनकी अपनी टीम में भी कुछ मतभेद हैं जिन्हें वह जल्द ही दूर कर देंगे. हालांकि बाद में अन्ना हजारे ने सफाई देते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी टीम को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं।

अन्ना ने कहा कि अनशन के दौरान सरकार से बातचीत में अहंकार आड़े आ रहा था। सरकार की ओर से चिदंबरम और सिब्बल अड़े थे और हमारी और से प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल। मुझे सही जवाब नहीं मिल रहा था, यहां तक कि प्रधानमंत्री का रुख भी साफ नहीं था। इससे ही मामला जटिल हो गया। बाद में एक मंत्री और विलासराव देशमुख वार्ता में आए। मैं विलासराव को लंबे समय से जानता हूं। इसी से ही वार्ता संभव हो सकी। अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण अच्छे लोग हैं हालांकि उनमें जरूरी बदलाव लाने की जरूरत है। मैं यह काम करूंगा।  हालांकि टीम अन्ना के बीच मतभेद या अहंकार की बात मीडिया में आते ही अन्ना ने इस पर सफाई दे दी। गौरतलब है रामलीला मैदान में अनशन के दौरान सरकार से बातचीत को लेकर टीम अन्ना पर भी सवाल उठे थे और ऐसा कहा जा रहा था कि उनकी टीम में भी मतभेद है। अन्ना की टीम से स्वामी अग्निवेश के अलग हो जाने से इस बात को और बल मिला था। हालांकि बाद में अन्ना ने कहा था कि वह स्वामी अग्निवेश का काम देखकर उन्हें दोबारा मौका दे सकते हैं।

संसदीय मामलों के मंत्री पवन बंसल ने कहा  आप किसी काम को किसी की गर्दन पर पिस्तौल रख कर नहीं करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति लोकपाल बिल पर काम कर रही है और इसपर समिति के सदस्यों की राय जाना रही है. पवन बंसल की यह टिपण्णी अन्ना हजारे की उस धमकी के बाद आई है जिसमें उन्होंने  कहा था कि अगर कांग्रेस ने शीतकालीन सत्र में जन लोकपाल बिल पास नहीं किया तो अगले साल पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में अभियान चलाकर लोगों से वह कांग्रेस पार्टी को वोट नहीं देने की अपील करेंगे।

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