काश्मीर एक ऐसी समस्या है, जिस पर लगातार कुछ न कुछ चलता ही रहता है और यह चलता ही जायेगा. मामला कभी काफी गर्मा जाता है और फिर ठंडा पड़ जाता है, लेकिन यह कभी खत्म नहीं हो रहा. यह एक राख में दबी आग है, जो कभी भी भड़क जाती है.
पाकिस्तान के लिये यह एक राजनैतिक फायदे का मुद्ïदा है. उसकी अंदरूनी राजनीति या आर्थिक हालातों में जब हालात खराब होते हैं तो वह काश्मीर को गर्मा देती है और वहां के लोगों का ध्यान उस ओर हो जाता है.

भारत के लिये यह एक राजनैतिक तनाव का मुद्ïदा है, क्योंकि पाकिस्तान की शह व मदद…… से ही वहां हथियार व आतंकी दोनों पहुंच रहे हैं. बीच मेें वहां आतंकियों ने एक नये किस्म का आंदोलन छेड़ा कि वहां के लोगों को नियमित रूप से पत्थरों की सप्लाई इसलिये कीे ताकि वह सुरक्षा बलों पर लगातार पत्थर बाजी करते हैं. इससे निश्चित ही वहां गंभीर स्थिति पैदा हो गई. इसी दौर में बढ़ती हिंसा के मद्ïदेनजर सरकार ने पत्रकार दिलीप पडगांवकर की अध्यक्षता में वार्ताकारों का एक दल गठित किया जो काश्मीर के सभी पक्षों से बात कर समाधान के बारे में सुझाव देगा, लेकिन इस दल ने जो रिपोर्ट दी है, वह प्रस्तुत होते ही भारत के अधिकांश प्रमुख विरोधी दलों और काश्मीर में भी अलगाववादी संगठनों ने भी इसे अस्वीकार कर दिया. संविधान की धारा 370 जो अस्थाई रूप से काश्मीर को विशेष दर्जा देती है. उसकी हिमायत की है, जबकि संविधान में ही इस धारा को ‘अस्थाई व्यवस्थाÓ सब टाइटिल के साथ लिखा गया है. इसे खत्म करने की मांग करना संविधान के अनुकूल है.

इसमें कुछ समय के लिये काश्मीर के मामले में वे ही कानून लागू होंगे जो संघीय विषय होंगे और वहां की राज्य सरकार की सहमति हो. एक अर्से तक वहां पृथक झंडा…. था, और सदरे रियासत राज्य का प्रमुख होता था. अब वहां गर्वनर हो गया है और भारतीय ध्वज है ही वहां का झंडा है. काश्मीर के लिये यदि अब कोई विशेष व्यवस्था की जानी चाहिये. वह यही है कि उसे भारत के अन्य राज्यों के समान ही दर्जा दे दिया जाये. उसे जो विशेष दर्जा दिया हुआ है, वही उसकी हीनता का द्योतक है कि वह अभी अन्य राज्यों के समकक्ष नहीं है. अब उसे समकक्ष ले आना चाहिये और इसके लिये विशेष प्रावधान खत्म किया जाये.

अनायास यह हो गया कि इस्लामी धर्मान्धता में मेहबूबा मुफ्ती की पी.डी.पी. ने अमरनाथ यात्रा के लिये श्री नगर यात्रा कार्यालय के लिये जमीन देने का विरोध किया. जबकि भारत के अन्य सभी राज्यों में मुसलमानों को हज हाउस के लिये जमीन दी गई है. इस मुद्ïदे पर काश्मीर घाटी में मुसलमान परस्तों ने अनिश्चित कालीन बंद शुरू कर दिया. इससे जम्मू का हिन्दू समुदाय भड़क उठा और उसने इस बात पर जम्मू बंद किया कि यदि अमरनाथ यात्रा कार्यालय को जमीन नहीं दी गई तो जम्मू भी अनिश्चित काल के लिये बंद रहेगा. नतीजा यह हुआ कि काश्मीर घाटी में ट्रकों….. से माल पहुंचना रुक गया और काश्मीर घाटी में हर चीज का अभाव हो गया. तब से वहां बंद की राजनीति पर ब्रेक लगा है.

हाल ही संघीय लोकसेवा आयोग की सिविल सर्विस परीक्षा (आई.एस.एस.) में काश्मीर की एक लड़की तहरीश असगर चुनी गई है. उन्होंने कहा है कि वह किश्तवाड़ की हैं जहां हमेशा आतंकवादी सक्रिय रहते हैं. लड़कियां दहशत में रहती हैं. इसलिये वे जम्मू व श्रीनगर में रहकर पढ़ी हैं और आई.ए.एस. में चुनी गई है. वहां की सबसे बड़ïी परेशानी पाकिस्तान व अलगावादियों का आतंक है. इसे खत्म कर दिया जाये तो सब ठीक हो जायेगा.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: