मध्यप्रदेश की माटी से ही है राज्य का प्रशासनिक मुखिया, आज से कमान

भोपाल, 30 अप्रैल, नभासं. किसी व्यक्ति को सपनों से यदि ज्यादा मिल जाए तो इसे ईश्वर की मेहरबानी ही कहेंगे. कुछ ऐसा ही राज्य के नवनियुक्त मुख्य सचिव आर. परशुराम के साथ हुआ. भारतीय प्रशासनिक सेवा में 34 सावन बिता चुके परशुराम की तमन्ना आज भी कलेक्टर बनने की थी.

लेकिन ईश्वर की मेहरबानी और जनमानस की दुआओं ने उनके सपनों को चार-चांद लगा राज्य के मुख्य सचिव के ओहदे तक पहुंचा दिया. जबकि उनकी दिली तमन्ना आज भी किसी जिले का कलेक्टर बनने की थी. लेकिन अब तो वह एक जिला नहीं पूरे राज्य के प्रशासनिक मालिक बन गए. मुख्य सचिव आर. परशुराम ने नवभारत को कुछ अनछुए पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि  राज्य के सबसे बड़े पद पर यानी मुख्य सचिव बनना उन्होंने कभी नहीं सोचा था जब नौकरी में आये थे तो उस दौरान प्रशिक्षण कलेक्टर के अन्तर्गत होता था, इसलिये धीरे-धीरे मन में कलेक्टर बनने की तमन्ना रहती थी. मुख्य सचिव के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं इनका सामना किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी काम प्रशासन में मिले उसे बेहतर तरीके से करें जिसका असर भी दिखे.

अभी भी कम है मेहनताना: श्री परशुराम ने कहा कि हर विकासशील देश में सरकारों ने अफसरों को अनेक सुविधाएं दे रखी हैं लेकिन निजी कंपनियों की तुलना में सुविधायें और वेतन कम है. उन्होंने कहा कि जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है या अन्य अधिकारियों को सौंपी जाती है उसका उनके साथीगण सफलतापूर्वक निर्वहन करते है. उन्होंने नयी जिम्मेदारी और चुनौती का प्रदेश हित में बेहतर तरीके से निर्वहन कैसे कर सकें इसके प्रयास व्यापक स्तर पर किये जायेंगे.  इसमें प्रशासनिक अधिकारियों समेत जनता और शासन का सहयोग जरूरी है. उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के इस पद पर पहुंचने के लिये वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कृतज्ञ हैं.

संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर होंगे केन्द्रित: मुख्य सचिव मानना है कि राज्य में बेहतर प्रशासन देने तथा गुड गवर्नेंस के लिए संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग किया जायेगा. शासन और प्रशासन के विभिन्न जन  हितैषी कार्यों के सफल और पारदर्शी प्रशासन के लिए आईसीटी आधारित नये-नये साफ्टवेयर एवं एप्लीकेशन्स के साथ.साथ वीडियो
कांफ्रेंसिंग समेत ई गर्वनेन्स और मोबाइल गवर्नेंस को ज्यादा प्रयोग में लाया जायेगा. 28वें मुख्य सचिव: भारतीय प्रशासनिक सेवा 1978 बैच के आर. परशुराम ने प्रदेश के 28वें नये मुख्य सचिव का आदेश जारी होने के बाद बातचीत में कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्य में ऐसा वातावरण मिला है जहां सब लोग मिल जुलकर कार्य कर रहे हैं और राज्य की जनता की आशाओं के अनुरूप  शासन देने का प्रयास हो रहा है. यह प्रयास जारी रहेगा.

राजनीति से कोई लेना-देना नहीं:  नव नियुक्त मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से हमारा कोई लेना देना नहीं है. यह काम राजनेताओं और राजनैतिक दलों का है. हमारा काम बेहतर प्रशासन देना है. उन्होंने कहा कि वे बतौर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अच्छा समन्वय बनाने की कोशिश करेंगे और काम भी यही है. उन्होंने बताया कि 29 अपै्रल तक चार लाख इकतीस हजार छ: सौ तीस से अधिक किसानों से उन्तालिस लाख बारह हजार से अधिक मैट्रिक टन गेहूँ की खरीदी ई उपार्जन के माध्यम से की गई है.

अवसर भुनाने का समय: उन्होंने बताया किया मप्र में अवसर अनेक हैं अब इनको भुनाने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य विकसित राज्यों की भांति अब तेज गति से प्रगति करने की बात राज्य में होने लगी है. इस दिशा में प्रयास तेज किये जायेंगे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की जो प्राथमिकता और घोषणाऐं हैं. उन पर तीव्रगति से काम किया जायेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है कि राज्य में अधोसंरचना के साथ-साथ युवाओं को कौशल विकास मिले जिससे राज्य का युवा प्रदेश एवं देश में ही नहीं विदेशों में भी काम कर सके और राज्य का नाम गौरान्वित कर सके.

मध्यप्रदेश के माटी के पूत: भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1978 बैच के अधिकारी आर. परशुराम का जन्म 24 मार्च 1953 को मध्यप्रदेश में हुआ. विद्यार्थी जीवन से अध्ययनशील परशुराम ने विद्युत यांत्रिकी में उपाधि प्राप्त की. प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के पश्चात  परशुराम की प्रारंभ से ही महत्वपूर्ण पदस्थापनाएँ रहीं हैं. वर्ष 1980 में एसडीओ, 1981 में उद्योग विभाग में प्रबंध संचालक, औद्योगिक केंद्र विकास निगम रीवा, 1983 में कलेक्टर सीधी, 1984 में कलेक्टर सतना, 1986 में कलेक्टर बस्तर पदस्थ किया गया. वर्ष 1988 से 1992 के बीच आप भारत सरकार में वस्त्र मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ रहे.

परशुराम 1995-1998 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सचिव, 1998-2001 में सचिव कृषि तथा वर्ष 2001-2003 में सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी पदस्थ रहे. वर्ष 2004 में वे प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव पर्यटन के पद पर पदस्थ रहे. तत्पश्चात वे भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर संयुक्त सचिव (ब्रॉडकास्टिंग ), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पद पर पदस्थ रहे. उसके बाद उनका चयन मिनिस्टर (एग्रीकल्चर), भारतीय दूतावास, रोम (इटली) के लिए हुआ. उस पद पर रहते हुए उन्होंने रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संबंधी 3 प्रमुख संस्थाओं यथा विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन, अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष एवं विश्व खाद्य कार्यक्रम में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 2009 में राज्य शासन में लौटने पर उन्हें विकास आयुक्त एवं प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय विभाग पदस्थ किया गया. इसी विभाग में पदोन्नत होकर उन्हें अपर मुख्य सचिव पदस्थ किया गया. तत्पश्चात उन्हें वर्ष 2011 में कृषि उत्पादन आयुक्त भी नियुक्त किया गया.

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