नई दिल्ली, 9 नवंबर. राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने कृषि वैज्ञानिकों से कहाकि वर्षा निर्भर कृषि क्षेत्र के विकास पर अधिक ध्यान दें. राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने देश के आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र के विकास को महत्वपूर्ण बताते हुए कृषि वैज्ञानिकों और क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों से भविष्य पर नजर रखते हुए वर्षा आश्रित क्षेत्रों में कृषि के विकास के तरीके ढूंढने का अधिक ध्यान देने का आह्वान किया.

पाटिल ने कहा आबादी का बड़ा हिस्सा जीवनयापन के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, इस लिहाज से देश के समूचे आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र का विकास काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. राष्ट्रपति बुधवार को कृषि क्षेत्र में ज्ञान प्रबंधन और नवीन दृष्टि पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कर रही थी. राष्ट्रपति पाटिल ने वैज्ञानिकों और कृषि क्षेत्र से सीधे या परोक्ष तरीके से जुड़े सभी पक्षों का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें भविष्य को ध्यान में रख कर व्यापक दृष्टि से सोचना होगा, ताकि कृषि क्षेत्र में नई शुरुआत की जा सके. उन्होंने कहा विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती पर ध्यान देना होगा, क्योंकि इस क्षेत्र को व्यवस्थित बनाने से ही समूचे कृषि क्षेत्र में सफलता मिल सकेगी. खेती जीवन की मूल जरूरत है और यह अपने आप में एक बेहतर पेशा है. चाहे अमीर हो या फिर गरीब अनाज के बिना जीवन मुश्किल है. यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा हासिल करना पूरी दुनिया के लिये प्राथमिक लक्ष्य बन गया है.

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन उचित समय पर हो रहा है जब पूरी दुनिया में खाद्य सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बन गया है. सम्मेलन के उद्घटन सत्र में कृषि मंत्री शरद पवार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एस. अयप्पन और देश विदेश के आमंत्रित कृषि वैज्ञानिक तथा विशिष्टजन उपस्थित थे. राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की आबादी सात अरब पर पहुंच चुकी है और यह सवाल खड़ा हो रहा है कि पृथ्वी कितने लोगों का पालन पोषण कर सकती है. पृथ्वी पर भूमि और जल संसाधन काफी सीमित हैं. पाटिल ने कहा कि जल सीमित है और कृषि भूमि के विस्तार की संभावनाएं सीमित रह गई हैं. ऐसी स्थिति में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के मामले में नवीन सोच और ज्ञान प्रबंधन प्रणाली में नई प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर देना होगा. पाटिल ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नई जानकारियों को किसानों तक पहुंचाने पर केन्द्रित है. देश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों को वर्षा पर निर्भर खेती के क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में होने वाली कोई भी क्रांति वर्षा आधारित खेती को साथ लेकर होनी चाहिए. वर्षा पर निर्भर खेती में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

कम उत्पादकता, पानी की कमी, छोटे खेत जैसी कई समस्याओं के चलते इस खेती में पूरा लाभ नहीं मिल पाता. उन्होंने कृषि क्षेत्र को दूसरे क्षेत्रीय संस्थानों के साथ जोडऩे की आवश्यकता पर भी बल दिया. पाटिल ने कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिये किसान केन्द्रित उद्योग से जुड़ी नीतियां बनाने और ज्ञान आधारित परिवेश कायम करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ज्ञान प्रबंधन रणनीति बनाते समय तीन मुख्य बातें को ध्यान में रखा जाना चाहिए. पहला परियोजनाओं में मिले अनुभव को आपस में बांटना, दोहराव से बचना और अनुसंधान पर बार बार खर्च कम करना. दूसरा किसानों को वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के साथ बातचीत में मदद करना तथा जमीनी स्तर की कठिनाईयों से अवगत कराना. तीसरा क्षेत्र विशेष की स्थिति के अनुसार कृषि ज्ञान की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना चाहिए.  प्रयोगशालाओं से लेकर किसान तक ज्ञान को पहुंचाना सरल और उपयुक्त समय पर पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिये ताकि इसका उत्पादक कार्य में बेहतर इस्तेमाल हो सके.

Related Posts:

कुडनकुलम विरोध पर विदेशी हाथ का संदेह
किसानों के प्रति गडकरी चिंतित क्यों
प्रीमियम बस सेवा ‘टोपी सरकार के तुगलकी दरबार’ का एक और नमूूूना : भाजपा
थाइलैंड के प्रधानमंत्री ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में की पूजा अर्चना
एनटीपीसी दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी मिले : राहुल
दलितों के साथ संवाद में राहुल ने कहा - आरएसएस है मनुवादी संगठन