संसदीय कार्य मंत्री मिश्रा ने किया नपा अध्यक्षों के प्रबोधन का उद्घाटन

भोपाल,28 मई, संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिये यह आवश्यक है कि विभिन्न स्तरों पर चुने गये जन-प्रतिनिधि स्वयं भी संसदीय परम्पराओं का निर्वहन करें तथा दूसरों से भी करवायें. डॉ. मिश्रा आज यहाँ प्रदेश के महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों के लिये एक दिवसीय संसदीय पद्धति एवं प्रक्रिया संबंधी प्रबोधन को संबोधित कर रहे थे.

डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह लोकतंत्र की विसंगति है कि देश एवं प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी स्थानीय जरूरतें हावी हो जाती हैं. उदाहरण स्वरूप गली का खड़ंजा या मोहल्ले की सड़क के निर्माण पर ही पार्षद से लेकर संसद तक का चुनाव केन्द्रित हो जाता है.  उन्होंने कहा कि ऐसी विसंगतियों को दूर करना मजबूत लोकतंत्र के लिये बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की यह और बड़ी जवाबदारी हो जाती है कि वे कब और क्या बोलें. क्षेत्र के लोगों की पहुँच इन तक प्रतिदिन और आसान है.

डॉ. मिश्रा ने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर स्थानीय शासन के जन-प्रतिनिधियों के लिये संसदीय पद्धति एवं प्रक्रियाओं से परिचय कराने के लिये इस तरह के कार्यक्रम आवश्यक हैं. विधानसभा के प्रमुख सचिव डॉ. पाण्डे ने प्रदेश के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष पंडित कुंजीलाल दुबे के नाम पर स्थापित संसदीय विद्यापीठ की जानकारी दी. प्रमुख सचिव संसदीय कार्य सेमवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जन-प्रतिनिधियों के कर्त्तव्य हैं और उन्हें किस प्रकार व्यवहार में लाया जाना चाहिये यह जानने के लिये प्रबोधन कार्यक्रम की आवश्यकती बनी रहती है.प्रारंभ में मंत्री डॉ. मिश्रा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. विद्यापीठ के उप सचिव एल.सी. मोटवानी ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम में विधानसभा प्रश्न, स्थगन, ध्यानाकर्षण, अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा, विधि निर्माण, नगरीय निकायों का प्रशासन एवं प्रबंधन विषयों पर विधानसभा के वरिष्ठ एवं विपक्ष के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा व्याख्यान दिये जायेंगे.

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