गृह मंत्री द्वारा राज्य-स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल,22 अप्रैल. गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने समाज को नशे से बचाने के लिए प्रदेश में जन-जागरण अभियान संचालित करने पर बल दिया है. प्रदेश में नशीले पदार्थों की रोकथाम के उपायों पर जन चर्चा के लिए होटल अशोका लेक व्यू में राज्य-स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए गुप्ता ने इस अभियान में स्कूल, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग की सहभागिता को समाज उपयोगी बताया.

गृह मंत्री  गुप्ता ने कार्यशाला में शामिल प्रदेश के विभिन्न अचंलों के समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों और पुलिस, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय आदि विभाग के मैदानी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है. इस खतरे से केवल कानूनी तौर पर नहीं निपटा जा सकता. इसके लिए सभी को मिल-जुल कर काम करना होगा. गृह मंत्री ने इस ज्वलंत समस्या से निपटने के लिए नशीले पदार्थों की सप्लाई के स्त्रोतों को रोकने तथा वितरण के संभावित स्थलों पर सख्ती से पेश आने की जरूरत बताई.

अपर मुख्य सचिव गृह अशोक दास ने कहा कि नौजवान पीढ़ी को नशे की लत से बचाकर ही भविष्य सँवारा जा सकता है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला के निष्कर्ष शासन स्तर पर प्रभावी रणनीति बनाने में कारगर सिद्ध होंगे. पुलिस महानिदेशक नन्दन दुबे ने कहा कि कोई भी नशा इन्सान के तन-मन को कमजोर करता है और हताशा का शिकार बनाता है. नशे से केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को नुकसान होता है. दुबे ने मानव समाज की खुशहाली के लिए नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण कायम करनेे को जरूरी बताते हुए इस कार्य में समाज के सभी वर्गों की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया.

प्रारंभ में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय अरूणा शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश यंग इंडिया का प्रतिनिधित्व करता है. यहाँ की जनसंख्या में तीस वर्ष से कम उम्र के युवक-युवतियों की संख्या देश में सर्वाधिक है. उन्होंने कहा कि इसलिए प्रदेश की युवा पीढ़ी को नशे की बुराई से बचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. श्रीमती शर्मा ने युवा वर्ग में नशे के विरूद्ध दृढ़ इच्छा-शक्ति विकसित करने और मनोवैज्ञानिक रूप से उन्हेंं नशे के खिलाफ आगाह करने के तरीकों को कारगर बताया. प्रमुख सचिव ने कहा कि कार्यशाला के मंथन के पश्चात् नशे के विरूद्ध क्रांतिकारी रणनीति बनाई जाएगी. इस अवसर पर यूएनओडीसी के प्रतिनिधि श्री कुनाल किशोर ने प्रतिभागियों को विषय की गंभीरता के बारे में विस्तार से बताया.

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