सेना प्रमुख द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी के मुद्दे पर मचा बवाल, गर्मायी संसद

नई दिल्ली, 28 मार्च. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी गई आर्मी चीफ वी.के. सिंह की चिट्ठी  ने देश की सियासत को गरमा दिया है. सरकार के साथ-साथ विपक्ष की कई पार्टियों ने भी जनरल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने इस मुद्दे पर बुधवार को संसद में कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री और अन्य पक्षों से विचार कर वह उचित कदम उठाएंगे.

साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, बीजेडी, जेडीयू ने सरकार से रक्षा मंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. कुछ ने तो सेना प्रमुख को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है. आरजेडी के लालू प्रसाद यादव ने कहा कि सेना प्रमुख चुनाव लडऩा चाहते हैं, इसीलिए ऐसा कर रहे हैं. उनके खिलाफ कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए. अन्य प्रमुख दल भी इस मुद्दे पर सरकार के साथ दिखे. एंटनी ने राज्यसभा में कहा कि जनरल सिंह ने 12 मार्च को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुरक्षा संबंधी मुद्दों को उठाया था. उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों को मीडिया में उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई हित नहीं हो सकता.  रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा तैयारियों और सेना को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने और आधुनिकीकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.

सेना से जुड़ी खबरों की सार्वजनिक चर्चा चिंताजनक- विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सेना से जुडी़ जो खबरें आ रही हैं, वे चिंताजनक हैं. सीताराम येचुरी ने कहा जो खबरें आ रही हैं वे गंभीर चिंता का विषय हैं. सेना प्रमुख पर हो जल्द कार्रवाई-बीजेडी के प्यारी मोहन महापात्र ने कहा कि इस तरह की जांच से अनावश्यक विलंब होगा. फौरन कार्रवाई की जरूरत है. ऐसे मामलों में दोषियों को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए. जेडीयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि हमारे देश में फौज राजनीति से अलग रही है. मोहन सिंह और रामगोपाल यादव ने कहा कि आर्मी चीफ के रवैये को सही नहीं ठहराया जा सकता है. यालार रवि ने सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह को हताश व्यक्ति करार दिया है. उनकी यह टिप्पणी सेना में हथियार व युद्ध सामग्री की कमी को लेकर सेना प्रमुख की ओर से प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के सम्बंध में आई है. रवि ने कहा कि सेना अनुशासित बल है , लेकिन सेना प्रमुख को कोर्ट से भी सेवा विस्तार नहीं मिला. सम्भव है कि वह हताशा में ये कदम उठा रहे हों.

रिश्वत प्रकरण में एंटनी हो सकते हैं गवाह!
जनरल वीके सिंह को रिश्वत की पेशकश मामले में रक्षा मंत्री एके एंटनी गवाह हो सकते हैं. रक्षा मंत्री का बयान लिया जा सकता है. सीबीआई ने आर्मी चीफ को चि_ी लिखी है. जानकारी के अनुसार, इस पत्र में कहा गया है कि आर्मी चीफ तुरंत शिकायत दर्ज करवाएं क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मसला है. उच्च सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब टेट्रा डील के सभी पक्ष की जांच करेगी. इसलिए जांच एजेंसी ने सभी फाइलें रक्षा मंत्रालय से मांगी हैं. गौर हो कि जनरल वीके सिंह ने बीते दिनों दावा किया था कि एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने उन्हें 14 करोड़ रूपये की रिश्वत देने का प्रस्ताव दिया था. इस बीच, सीबीआई ने रक्षा मंत्रालय को बताया है कि वह टाट्रा ट्रकों की खरीद को लेकर हुए समझौते से जुड़ी फाइलें तैयार रखें क्योंकि एजेंसी इस संबंध में एक अलग मामला दर्ज कर सकती है. जनरल सिंह ने इस खुलासे में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन सेना की ओर से पांच मार्च को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह का जिक्र किया गया जिन पर टेट्रा एंड वेक्ट्रा लिमिटेड की ओर से रिश्वत की पेशकश करने का आरोप है.

बीजेपी जनरल के साथ
तमाम दल आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह को बर्खास्त करने की मांग के पक्ष में खड़े हो गए हैं, मगर बीजेपी अभी तक खुद को इस मांग से अलग किए हुए हैं. संसद के अंदर भी उसके नेताओं ने सेना की कमियों पर सार्वजनिक चर्चा को चिंताजनक बताया, लेकिन इस मसले पर आर्मी चीफ को दोषी बताने से बचे. रविशंकर प्रसाद ने कहा,  हम इस मांग का समर्थन नहीं करते.

देश की अखंडता से समझौता नहीं: एंटनी
एंटनी ने कहा कि हम देश की अखंडता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे. इस मामले में हम दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे. उन्होंने सेना प्रमुख के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पत्र के मीडिया में लीक होने पर विपक्ष के नेताओं द्वारा जताई गई. चिंता को उचित ठहराते हुए कहा कि वह सदन में सभी दलों के नेताओं को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं कि देश की सुरक्षा के मामले पर सबने एकजुटता दिखाई. रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार देश की प्रत्येक इंच भूमि की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी. उन्होंने कहा कि पिछले विवादों के बावजूद हम खरीद प्रक्रियाओं को दुरुस्त कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ कई कार्रवाई की गई हैं.

सेनाध्यक्ष के पत्र का मजमून

* सेना प्रमुख की चिट्ठी में जो प्रमुख चिंताएं जाहिर की गई हैं, वे निम्न हैं-
* आर्मी के पूरे टैंक दस्ते के पास जरूरी गोला बारूद की भारी कमी है.
* हवाई सुरक्षा के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले 97 फीसदी हथियार और उपकरण पुराने पड़ चुके हैं.
* आर्मी की एलीट स्पेशल फोर्स के पास के पास जरूरी हथियारों की कमी है. यह काफी चिंताजनक है.
* पैदल सेना के जवानों के पास हथियारों की कमी. उनके पास रात में दुश्मन से लडऩे की क्षमता की भारी कमी.
* एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल्स की मौजूदा उत्पादन क्षमता और उपलब्धता बेहद कम है.
* लंबी दूरी तक मार करने वाले तोपखाने में पिनाका व स्मर्च रॉकेट सिस्टम का अभाव.

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