ईडी ने शुरूआत से ही समीक्षा सहित अपनाई अन्य रणनीति

ललित पटैरिया
भोपाल, 29 मार्च, नभासं. भेल के उत्पादन के अंतिम दौर में लक्ष्य से अधिक  उत्पादन करने हेतु ईडी गुप्ता सहित सभी कर्मचारी एवं अधिकारीगण रात दिन जुटे है. इस उत्पादन के आंकडों से सभी के लाभ या हानि की बात जुड़ी है. वहीं 4 अप्रैल को पत्रकारों के समक्ष ईडी गुप्ता चालू वित्तीय वर्ष के उत्पादन के वास्तविक आंकडें उजागर करेंगे.

भेल के कार्यपालक निदेशक एस.एस. गुप्ता ने विषम परिस्थितियों की चुनौती का सामना करते हुये न केवल प्रथम तिमाही बल्कि तृतीय तिमाही तक का उत्पादन लक्ष्य कुल 2900 करोड़ का पूरा करवा लिया है बल्कि चालू वित्तीय वर्ष का उत्पादन लक्ष्य 4777 करोड़ है. इसके अलावा बाकी उत्पादन पूरा कराने के लिये कई कदम भी उठाये हैं. साथ ही उत्पादन के प्रति किसी भी प्रकार कौताही को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कार्यपालक निदेशक का पदग्रहण करने के बाद दूरगामी रणनीति अपनाते हुये प्रत्येक दिन का उत्पादन एवं कलेक्शन सहित अन्य तथ्यों की समीक्षा करने की नई परिपाटी शुरू की. इसके अलावा महाप्रबंधकों के बीच बिगड़े आपसी तालमेल को सुदृढ़ कराया. वहीं महाप्रबंधकों और एजीएम गणों के बीच तालमेल कराया तथा अधिकारियों के संबंध कर्मचारियों से मधुर स्थापित कराने के लिये कई कदम उठाये.

वहीं कर्मचारियों को काम के वक्त रॉ मटेरियल मुहैया कराने के प्रति सख्त निर्देश दिये. कारखाने के प्रतिदिन उत्पादन, डिलेवरी और कलेक्शन की समीक्षा करना शुरू की. कर्मचारियों को ड्ïयूटी पर कारखाने में समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के प्रति सख्ती बरती है. वहीं साथ-साथ ग्राहकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण उत्पाद समय पर ही तैयार कर डिलेवरी देने पर विशेष ध्यान दिया. ऐसे कदम उठाने पर सकारात्मक नतीजे प्रत्यक्ष रूप से सामने आये. निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 4777 करोड़ चालू वित्तीय वर्ष का है जिसका प्रथम तिमाही में उत्पादन 700 करोड़ पूरा हुआ. दूसरी तिमाही 1000 करोड़ तथा तृतीय तिमाही 1200 करोड़ का उत्पादन पूरा कराया गया है. मार्च के अंत तक 1877 करोड़ का उत्पादन होना है जिसमें से अब तक 20 मार्च तक 1727 करोड़ का उत्पादन पूर्ण हुआ है.

अब अंतिम दौर का उत्पादन लक्ष्य पूरा करनें में सभी कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा रात-दिन एक किये हुये हैं. अभी तक कलेक्शन 3600 करोड़ का हुआ है. गुप्ता औचक भ्रमण कर कारखाने के ब्लाक में कमियों का निराकरण शीघ्र करवा रहे हैं. इसके अलावा तृतीय पाली भी शुरू करवा दी और एक एजीएम एवं डीजीएम को रात्रि में तैनाती तय कर दी है.

ट्रेक्शन को उबारने का प्रयास-
ट्रेक्शन विभाग के महाप्रबंधक मुकेश खासगीवाल लक्ष्य 565 करोड़ पूरा करने में विभाग के कर्मचारियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं. साथ ही उन्हें संबंधित रॉ मटेरियल समय पर उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहे हैं. रेलवे विभाग के अधिकारियों से सतत्ï संपर्क कर आर्डर लेने के प्रयास में भी जुटे हैं.

नवभारत का विश्लेषण-
नवभारत ने एस.एस. गुप्ता के व्यक्तित्व, दक्षता, क्षमता एवं कार्यशैली की पूर्व में ही परख करते हुये खबर शीर्षक ‘ईडी गुप्ता को विपरित परिस्थितियों में आता है काम करनाÓ प्रकाशित की थी. इस खबर की सार्थकता अब शनै:-शनै: स्पष्टï हो रही है कि जिस दौर में एस.एस. गुप्ता ने कार्यपालक निदेशक का 24 जून-11 को दायित्व संभाला था उस दौर में भेल के अधिकतर महाप्रबंधक के बीच अपर महाप्रबंधक तथा अधिकारियों के मध्य कर्मचारियों में भी तालमेल का अभाव था. इसके अलावा मंत्री गौर की हठधर्मिता के चलते कारखाने में अपर्याप्त या फिर पानी की सप्लाई पूर्ण बंद करवा दी गई थी. ऐसी विषम परिस्थिति में गुप्ता निराश नहीं हुये बल्कि कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के अलावा पानी की व्यवस्था पुन: चालू कराने के प्रयास में जुटे रहे.

इस काम के लिये उन्हें मंत्री, महापौर तथा नगरीय प्रशासन सचिव से गुहार लगाने के लिये समय व्यर्थ करना पड़ा. आखिरकार उनकी गुहार पर नवभारत के हस्तक्षेप खबर के माध्यम से करने पर राज्यपाल रामनरेश यादव ने भेल कारखाने की गरिमा बनाये रखने के ध्येय से दोनों पक्षों के बीच हस्तक्षेप कर पानी सप्लाई पुन: शुरू कराई. विशेष रूप से सबसे ज्यादा कठिन दौर गुप्ता को आंकलन एवं विश्लेषण करने में बीताना पड़ा कि किस ग्राहक को आर्डर समय पर डिलेवरीी करना है या फिर कौनसा ग्राहक आर्डर देने के उपरांत उत्पाद तैयार कराने की अनुमति नहीं दे रहा है. इस बात को ध्यान में रखते हुये आगामी वर्ष हेतु आर्डर प्राप्ति की दिशा में व्यापक स्तर पर प्रयास जारी रखा है. ऐसी क्रक्रिया के चलते वर्ष 2011-12 का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 4777 करोड़ से अधिक पूरा होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है.

निभाया साथ-
वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक महाप्रबंधक गिरीश श्रीवास्तव ने भी गुप्ता का साथ बखूबी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने उनके निर्देश पर टाउनशिप में व्याप्त पूर्व अव्यवस्था का वस्तुस्थिति का जायजा लेने हेतु औचक निरीक्षण कर कर्मचारियों की दिक्कतों को काफी हद तक दूर कराई. इधर जीएम गिरीश का नगर प्रशासक ए.के. चतुर्वेदी पूरा सहयोग देने का दायित्व निभाने में पीछे नहीं हटे.

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