मध्यप्रदेश से गुजरते समय ट्रेनों की यात्रा बिल्कुल असुरक्षित हो गई है. अभी तक यह खबरें आती थी कि चलती ट्रेन के किसी डिब्बे में हथियार बंद लुटेरों ने मुसाफिरों को लूट लिया. लेकिन अब यह दहलाने वाली खबर आई है कि तमिलनाडु एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन जो भोपाल से आगे दिल्ली की ओर जा रही थी. विदिशा के निकट दो छोटे स्टेशनों गुलाबगंज और पवई के बीच सश लुटेरों ने रात 10 बजे दो डिब्बों को जोडऩे वाली कपलिंग काट कर रोक दिया.

करीब आधा घंटे रोककर यात्रियों से जमकर लूटपाट की. उनको मारा और ट्रेन पर भारी पथराव किये. इस महत्वपूर्ण ट्रेन पर रेलवे पुुलिस या अन्य कोई पुलिस बल का कोई भी जवान या अधिकारी तैनात नहीं था. ऐसी पूरी आशंका है कि लुटेरों को यह पता था कि पूरी ट्रेन में कोई भी सुरक्षा कर्मी पुलिस बल नहीं है. रेलों में मध्यप्रदेश क्षेत्र में रेल असुरक्षा यह हो गई है कि ट्रेनों को रोककर संगठित अपराधी गैंग लूटने लगे हैं.

राजधानी भोपाल में पदस्थ रेलवे पुलिस अधीक्षक श्री आर.डी. खरे ने स्थिति की दयनीय दशा के बारे में यह स्वीकार किया है कि रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सभी ट्रेनों में जी.आर.पी. के जवान नहीं चलाये जा सकते. रुटों पर वारदातों के मुताबिक पुलिस की सुरक्षा हेतु ड्यूटी लगाई जाती है. वैसे भी ट्रेनों की संख्या के हिसाब से जी.आर. पी. उतना स्टाफ नहीं है. तमिलनाडु एक्सप्रेस को रोककर लूटने की जो वारदात हुई है उसे पुलिस किस वर्ग में रखेगी यह वही जाने. लेकिन बात साफ हो गई है कि शासन के पास रेलों की सुरक्षा के लिये स्टाफ ही नहीं है. लिहाजा मध्यप्रदेश राज्य से गुजरते समय ट्रेनों के यात्रियों को भगवान और लुटेरों के भरोसे छोड़ा जाता है. जैसे आजकल हर एक संस्थान ने निजी संस्थाओं के सुरक्षा गार्डों को सुरक्षा में ले रखा है उसी तरह रेल यात्रियों को अपनी सुरक्षा के लिये निजी सुरक्षा गार्ड लेकर चलना चाहिए. क्या ऐसा संभव है? यदि यह किया जाए तो उसका अर्थ होगा एक सुरक्षा गार्ड का भी टिकिट लेना और उसका खाने पीने का खर्चा उठाना. उस दशा में यात्री की भीड़ अपने आप में दुगुनी हो जायेगी और रेल यात्रा इतनी महंगी पड़ेगी कि आम आदमी रेल यात्रा कर ही नहीं सकेगा.

कानून व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सरकार का दायित्व है. यदि यही नहीं है तो उस सरकार को सरकार ही नहीं माना जा सकता. यह दलील बिल्कुल बेमानी है कि रेल सुरक्षा के लिए स्टाफ नहीं है. लेकिन इसमें पुलिस अधीक्षक, भोपाल का कोई दोष नहीं है. जो वस्तु स्थिति है वह उन्होंने बता दी. दायित्वहीनता तो राज्य सरकार की है. सुरक्षा के मामले में इस अव्यवस्था व दुर्दशा के लिए तो सरकार से इस्तीफा मांगना भी बिल्कुल जायज है और उसे त्यागपत्र दे भी देना चाहिए. इसी तरह गुना-बीना रेल खंड के रेहटवास स्टेशन पर दिन के डेढ़ बजे एक बैंक मैनेजर से ट्रेन में घुसकर 20 लाख रुपये लूट लिये. मध्यप्रदेश में रेल यात्री बिल्कुल असुरक्षित हो गए हैं.

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